पंजाब सरकार ने बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदन में राज्य के बिजली क्षेत्र के बारे श्वेत पत्र पेश किया। हालांकि सरकार द्वारा पहले यह कहा गया था कि निजी बिजली कंपनियों से अकाली-भाजपा सरकार द्वारा किए गए समझौते रद्द करने संबंधी प्रस्ताव लाया जाएगा लेकिन श्वेत पत्र के रूप में सरकार ने जो प्रस्ताव पेश किया वह राज्य में स्थापित तीन निजी थर्मल प्लांटों के साथ अब तक तय बिजली दरों को री-नेगोशिएट (पुनर्निधारित) करने संबंधी है। इसे लेकर विपक्षी दल आम आदमी पार्टी ने सदन में हंगामा किया और सरकार पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का आरोप लगाया।
आखिरकार सदन में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इन समझौतों की विजिलेंस जांच का आदेश दिया। मुख्यमंत्री चन्नी ने बिजली मंत्री के तौर पर और डॉ. राजकुमार वेरका ने गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्री के तौर पर पिछली सरकार द्वारा किए गए समझौतों पर श्वेत पत्र पेश किया, जिसमें बिजली दरों को री-नेगोशिएट करने की बात कही गई।
वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने आप विधायकों की ओर से उठाए सवालों पर कहा कि थर्मल प्लांट बंद नहीं हो रहे हैं, बल्कि उनके साथ तय की गई दरों को री-नेगोशिएट करने के लिए बिल लाया जा रहा है। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू ने मनप्रीत बादल के बयान के उलट सदन में कहा कि समझौतों को रद्द किया जा रहा है। इसी तरह कांग्रेस के कई अन्य सदस्यों ने भी यही कहा कि समझौतों को रद्द किया जा रहा है। इससे सदन में विचित्र स्थिति बन गई कि सत्तापक्ष के सदस्यों को भी पता नहीं था कि उनकी सरकार जो बिल लाई है, वह किस विषय पर है। मुख्यमंत्री ने भी सदन में परस्पर विरोधी बयान को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।
मनप्रीत से उलझे आप के विधायक
सदन में मनप्रीत बादल ने बहस के दौरान कहा कि अकाली-भाजपा सरकार द्वारा किए समझौतों से पंजाब के लोगों पर 50000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है। उन्होंने समझौतों को एकतरफा बताते हुए कहा कि पहले यह थर्मल प्लांट बनाओ, चलाओ और ट्रांसफर करो की नीति के आधार पर तैयार किए जा रहे थे लेकिन बाद में इसे बनाओ, चलाओ और अपने पास रखो वाली नीति पर कर प्लांटों की 5000 एकड़ जमीन कंपनियों को सौंप दी गई।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय रेगुलेटरी कमीशन ने पंजाब में तब मात्र 1800 मेगावाट की कमी बताई थी लेकिन सरकार ने 4000 मेगावाट के थर्मल प्लांट लगाने के समझौते कर लिए। इसमें 16 फीसदी लाभ देना, पूरे साल की बिजली जरूरत को औसत मानना, फिक्स चार्जेस देरी से देने पर 14.5 फीसदी ब्याज लगाने आदि जैसी शर्तें रखीं, जबकि पंजाब की जरूरत मात्र चार माह की थी, जब धान लगाया जाता है।
उन्होंने हाईकोर्ट के सिटिंग जज से समझौतों की जांच करवाने की मांग की। इस पर आप विधायक कंवर संधू और अमन अरोड़ा ने मनप्रीत बादल से पूछा कि जिस समय यह समझौते किए गए थे, उस समय आप ही वित्त मंत्री थे। इस पर मनप्रीत ने कहा कि वह अकेले ऐसे वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी की नीतियों से सहमत न होते हुए इस्तीफा दिया था। इस पर कंवर संधू ने उन्हें याद दिलाया कि इस्तीफा बिजली सब्सिडियों के कारण दिया था न कि बिजली समझौतों के कारण। अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर आप उस समय बोले होते तो पंजाब के लोगों पर 50000 करोड़ का बोझ नहीं पड़ता। अमन अरोड़ा ने वित्त मंत्री से पूछा कि आज पेश किए गए दोनों बिल अगर पारित हो जाते हैं तो पंजाब के लोगों को बिजली कैसे मिलेगी।