पंजाब सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) को 1 जनवरी 2016 से लागू करने के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत सभी को 1000 रुपये मासिक फिक्स्ड मेडिकल भत्ता दिया जाएगा। वित्त विभाग की ओर से मंगलवार को इस संबंध में संशोधित वेतनमान के तहत लागू होने वाली डीए की दरों को जारी किया है।
इसके अनुसार, 1 जनवरी 2016 को लागू डीए में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि 1 जुलाई 2016 के डीए में 2 फीसदी, 1 जनवरी 2017 के डीए में 4 फीसदी, 1 जुलाई 2017 के डीए में 5 फीसदी, 1 जनवरी 2018 के डीए में 7 फीसदी, 1 जुलाई 2018 के डीए में 9 फीसदी, 1 जनवरी 2019 के डीए में 12 फीसदी और 1 जुलाई 2019 के डीए की दर में 17 फीसदी का संशोधन किया गया है। इसके अलावा, डीए से संबंधित एरियर को संशोधित वेतनमान से आंकलन के बाद जारी किया जाएगा।
इस बीच, सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों लागू करने के फैसले के तहत ही सभी कर्मचारियो को 1000 रुपये मासिक फिक्स्ड मेडिकल भत्ता देने का फैसला किया है। यह ग्रांट पंजाब सिविल सेवाएं (संशोधित वेतन) नियम 2021 के अनुसार संशोधित वेतनमान के साथ लागू होगी और यह फैसला 1 जुलाई 2021 से प्रभावी होगा।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए विभिन्न विभागों में पंजाब सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2021 के अनुसार निर्धारित संशोधित वेतन पर कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य मासिक फिक्स्ड यात्रा भत्ता (एफटीए) की मौजूदा दर को संशोधित किया है। इसके तहत, लेवल-6 तक के वेतनमान तक एफटीए 1000 रुपये मासिक, लेवल-6 से लेवल-10 तक के वेतनमान वालों को 1500 रुपये और लेवल-10 से ऊपर के वेतनमान वालों को 2000 रुपये मिलेंगे।
नए फैसले के तहत, सेहत व परिवार कल्याण विभाग के उप स्वास्थ्य केंद्रों अथवा डिस्पेंसरियों में कार्यरत मेडिकल अफसर भी मासिक एफटीए के पात्र होंगे। यह संशोधन 1 जुलाई 2021 से प्रभावी होगा। छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करते हुए उन मुलाजिमों के सीसीए को दोगुना कर दिया है, जो पहले से इस भत्ते के पात्र हैं।
एनपीए के लिए नए आदेश जारी
वित्त विभाग ने गैर अभ्यास भत्ते (एनपीए) को हरी झंडी दे दी है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय यह मुद्दा कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद का विषय बन गया था लेकिन मंगलवार को नए सिरे से आदेश जारी करते हुए बेसिक वेतन की 20 फीसदी राशि के समान एनपीए देने का फैसला किया गया है। नए आदेश के अनुसार, राज्य के मेडिकल और स्वास्थ्य शिक्षा विभाग, होम्योपैथी मेडिकल अधिकारियों, आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारियों, पशु पालन, मछली पालन और डेयरी विभाग के वेटरेनरी डॉक्टरों को गैर-अभ्यास भत्ता मिलेगा।