सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते किसान
पराली प्रबंधन पर भाषण शुरू हुआ तो किसान भड़क गए और विरोध करते हुए बोले कि सरकार ने हमारे लिए किया ही क्या है, हम तो पराली जरूरी जलाएंगे। खेतीबाड़ी और किसान भलाई विभाग की ओर से पंजाब के मुक्तसर स्थि नई दाना मंडी में आयोजित किसान मेले में किसानों ने ही खलल डाल दिया। जैसे ही खेतीबाड़ी विभाग के एक अधिकारी ने पराली प्रबंधन पर भाषण शुरू किया, किसान बिफर गए और सरकार और खेतीबाड़ी विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक हमारे लिए किया ही क्या है, वे पराली जरूर जलाएंगे। जब किसान नेता नारेबाजी कर रहे थे तब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर व विधायक अजायब सिंह भट्टी समेत कई नेता मंच पर ही बैठे थे। यह हंगामा करीब आधे घंटे तक चला। किसान नेता निर्मल सिंह जस्सेआणा और सुखदेव बूड़ा गुज्जर ने कहा कि ग्रीन ट्रिब्यूनल को पराली का धुआं तो नजर आता है, मगर भट्ठों और कारखानों का धुआं नजर नहीं आता।
किसान बोले कि वह तो पराली जलाएंगे, कोई कुछ कहे। जब किसानों की खुदकुशी केंद्र सरकार को नजर नहीं आती तो पराली का धुआं कैसे नजर आ जाता है। किसान बोले कि खेतीबाड़ी विभाग कहता है कि पराली बीच में डालकर नई फसल की ऊपर से बिजाई कर दो। विभाग ये बताए कि पराली से नई फसल को सूंडी, फंगस और तेला कीट लग जाता है, उसके लिए क्या हल है। बिना स्प्रे किए ये बीमारी सिर्फ दो तरीके से खत्म हो सकती है। या तो तापमान जीरो डिग्री हो यानी बिल्कुल बर्फ जम जाए। या फिर 100 डिग्री से ऊपर चला जाए यानी बिल्कुल गर्म हो जाए। बर्फ तो यहां पड़ नहीं सकती। ऐसे में किसानों के लिए पराली जलाना ही एक विकल्प है।
किसानों ने कहा कि उनकी नैया डुबोने वाला खेतीबाड़ी विभाग खुद है। पहले तो कैंप लगाकर किसानों को मीठा जहर बेचता है। उन्हें फसलों को कीटनाशकों से बचाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च करने को बोलता है और बाद में फसल का सही भाव नहीं देता है। पहले कांग्रेस ने स्वामीनाथन रिपोर्ट पर राजनीति की। अब भाजपा इस पर राजनीति कर रही है। किसानों का कर्ज माफी का वादा अभी तक अधूरा है। पदाधिकारियों ने जब किसानों को समझाने की कोशिश कि वे पराली को जला नहीं सकते, इस पर वे वहां से उठकर चले गए।