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फिर केंद्र पर भड़के सिद्धू: फसल खरीद में फर्द की जरूरत पर उठाए सवाल, आरोप-एक राष्ट्र, दो बाजार बना रहा केंद्र

Tue, 14 Sep 2021 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नवजोत सिद्धू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का मंसूबा पंजाब के एपीएमसी सिस्टम को बर्बाद करना है। उन्होंने केंद्र के नेशनल सैंपल सर्वे 2012-13 का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि देश में 24 फीसदी खेती ठेके पर होती है। यह ठेके अलिखित और मुंह-जुबानी हैं, इनका कोई लिखित रिकार्ड नहीं होता। 
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navjot singh sidhu - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने केंद्र सरकार द्वारा फसल खरीद के लिए फर्द को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ऐसे नियम थोपकर एक देश-दो बाजार का सिस्टम लागू कर रही है।

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अपने ट्वीटर हैंडल से मंगलवार को सिद्धू ने दो ट्वीट किए और यह मुद्दा उठाते हुए लिखा कि खरीद से पहले एफएआरडी की अनिवार्य मांग के संबंध में केंद्र सरकार के आदेश पंजाब के सामाजिक आर्थिक ताने-बाने के खिलाफ हैं ... जानबूझकर एक राष्ट्र, दो बाजार बनाना क्योंकि ये आदेश केवल एपीएमसी मंडियों के लिए मान्य हैं जहां खरीद एमएसपी पर होती है न कि निजी मंडियों के लिए।

यह भी पढ़ें- पंजाब: सियासी दलों के निशाने पर किसानों के 32 संगठन, भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या का लगाया आरोप
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इससे पहले सिद्धू ने ट्वीट किया कि पंजाब की एक तिहाई भूमि पर पट्टे पर खेती की जाती है, जिनमें से कई मौखिक अनुबंध हैं, सांझा मुश्तरखा खाता के कारण - हमारे राज्य के कई हिस्सों में कोई स्पष्ट भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, कई भूमि मालिक विदेशों में रह रहे हैं और बहुत सारे भूमि रिकॉर्ड कानूनी विवादों के अधीन हैं।
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सिद्धू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का मंसूबा पंजाब के एपीएमसी सिस्टम को बर्बाद करना है। उन्होंने केंद्र के नेशनल सैंपल सर्वे 2012-13 का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि देश में 24 फीसदी खेती ठेके पर होती है। यह ठेके अलिखित और मुंह-जुबानी हैं, इनका कोई लिखित रिकार्ड नहीं होता। सिद्धू ने आरोप लगाया कि केंद्र के उक्त फैसले के कारण पंजाब के 25-30 फीसदी किसानों को पैसा नहीं मिल सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार निजी मंडियों को बढ़ावा देने के लिए यह कानून लाई है। किसान अडानी-अंबानी को फसल बेचें तो फर्द जरूरी नहीं, लेकिन सरकारी मंडी में फसल बेचने पर सारे कागजात जरूरी क्यों किए गए हैं?

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