सोमवार को सिद्धू ने लगातार तीन ट्वीट कर राज्य पर चढ़े हजारों करोड़ के कर्ज का हवाला देते हुए चन्नी सरकार को न सिर्फ कई सुझाव दिए थे, बल्कि प्रदेश की मौजूदा वित्त व्यवस्था की खामियां भी गिना डालीं थी। सिद्धू ने लिखा कि आज पंजाब भारत का सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में ऋण का हिस्सा 50 फीसदी है। हमारे खर्च का आधा हिस्सा महंगे कर्ज से आता है। उन वास्तविक मुद्दों से न हटें, जिनका प्रत्येक पंजाबी और पार्टी कार्यकर्ता समाधान की मांग करता है। वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पंजाब मॉडल के स्तंभ हैं। जवाबदेही, प्रत्येक योजना की घोषणा के साथ उसके धन के स्रोतों का खुलासा करने की मांग करती है, भले ही वह अधिक कर्ज से होने वाली आय से लिया गया हो। इसी तरह पारदर्शिता हर महीने राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सार्वजनिक करने की मांग करती है। उधार लेना आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है। टैक्स का पैसा कर्ज चुकाने के लिए नहीं बल्कि विकास के रूप में लोगों तक वापस जाना चाहिए। समाधान उन्मुख मॉडल वही होगा, जिसमें राज्य के संसाधनों की चोरी को रोकना, सरकारी खजाने को भरना और आय सृजन के माध्यम से एक कल्याणकारी राज्य का सृजन किया जाए।