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पंजाब: नए प्रधान सिद्धू का मेल-मिलाप जारी, बाजवा के आवास पर शक्ति प्रदर्शन, कैप्टन से मांगा मुलाकात का समय

Mon, 19 Jul 2021 11:31 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कांग्रेस हाईकमान ने जिस तरह कैप्टन को अनदेखा करते हुए नवजोत सिद्धू को प्रधान नियुक्त करने का एलान किया है, वह कैप्टन को बहुत नागवार गुजरा है। हाईकमान ने कैप्टन को बहुत ही हल्के में ले लिया। अब उन्हें सिद्धू किसी भी कीमत पर प्रधान के रूप में मंजूर नहीं हैं और हाईकमान के अपने प्रति इस बर्ताव को कैप्टन ने अपमान के रूप में लिया है।  
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चंडीगढ़ में मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के घर सिद्धू के समर्थन में जुटे मंत्री-विधायक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रधान नवजोत सिद्धू सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचे। सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा से उनके आवास पर मुलाकात की। वे मंत्री रजिया सुल्ताना से भी मिले। बाजवा के आवास पर पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रधान समेत कई मंत्री-विधायकों को जुटाकर सिद्धू ने शक्ति प्रदर्शन किया। वहीं सिद्धू ने विधायक अमरिंदर सिंह राजा वंडिंग के हाथों संदेश भेजकर कैप्टन से मुलाकात का समय मांगा है। राजा वडिंग सिसवां फार्म हाउस गए हैं लेकिन अभी तक कैप्टन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। माना जा रहा है कि सिद्धू नाराज कैप्टन को मनाने कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि सार्वजनिक तौर पर सिद्धू से माफी की मांग कर चुके कैप्टन मानते हैं या नहीं। वहीं सिद्धू ने पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल से भी मुलाकात की। सिद्धू के पंजाब कांग्रेस प्रधान बनते ही पार्टी मुख्यालय में उनका एक बड़ा होर्डिंग भी लग गया है।

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कांग्रेस हाईकमान ने जिस तरह कैप्टन को अनदेखा करते हुए नवजोत सिद्धू को प्रधान नियुक्त करने का एलान किया है, वह कैप्टन को बहुत नागवार गुजरा है। कैप्टन ने हाईकमान के फैसले का सम्मान करते हुए सिद्धू को प्रधान बनाने पर सहमति जता दी थी और एक मामूली शर्त यही रखी थी कि सिद्धू उन पर की गई अभद्र टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें, तभी वे सिद्धू से बात करेंगे। 
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कैप्टन और सिद्धू के कद का अंतर समझें तो यह शर्त बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन हाईकमान ने कैप्टन को बहुत ही हल्के में ले लिया। अब उन्हें सिद्धू किसी भी कीमत पर प्रधान के रूप में मंजूर नहीं है और हाईकमान के अपने प्रति इस बर्ताव को कैप्टन ने अपमान के रूप में लिया है। 1984 के घटनाक्रम के बाद पंजाब कांग्रेस में जान फूंकने वाले और 2017 में जब पूरे देश में कांग्रेस का सफाया हो गया था, तो पंजाब में अपने बूते पर कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ पार्टी हाईकमान ने मौजूदा मामले में जैसा सलूक किया है, कैप्टन उससे बुरी तरह आहत हुए हैं।

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