उन्होंने कहा कि यह कितनी शर्म की बात है कि स्वार्थ के खातिर कुछ नेता राज्य के हितों में खास कर किसानों के हित कुर्बान करने पर तुले हैं। जब तक फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक कृषि कानून रद्द कर देने का एलान भी बेबुनियाद है।
केंद्र सरकार को यह यकीनी बनाना चाहिए कि किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए, जिससे किसानों को निजी खरीदारों के हाथों से लूट से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन शहीद किसानों के नाम पर यादगार बनाएगी जिससे हमारी नौजवान पीढ़ियां उनके मिसाली संघर्ष से अवगत हो सकें। यह यादगार राज्य सरकार की तरफ से देश के अन्नदाताओं को विनम्र श्रद्धांजलि होगी।
किसानों के वारिसों को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के वारिसों को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे, जिनमें बलजिंदर सिंह पुत्र स्व. जंग सिंह, अमनदीप कौर पत्नी स्व. बलजिंदर सिंह, प्रभजोत कौर पुत्र स्व. मनमोहन सिंह, हरविंदर कौर पत्नी स्व. जगजीत सिंह और सतनाम सिंह पुत्र स्व. हाकम सिंह शामिल रहे।