मान ने इतिहास और पीयू से संबद्ध कॉलेजों की दिलाई याद
भगवंत मान ने कहा कि इस संस्था को लाहौर, जो उस समय पर पंजाब की राजधानी थी, से होशियारपुर तब्दील कर दिया गया था। उसके बाद पंजाब की मौजूदा राजधानी चंडीगढ़ में लाया गया था। इस समय पंजाब में यूनिवर्सिटी से संबद्ध 175 कॉलेज मान्यता प्राप्त हैं। ये कॉलेज फाजिल्का, फिरोजपुर, होशियारपुर, लुधियाना, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और एसबीएस नगर में स्थित हैं।
मान ने किया ये दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब यूनिवर्सिटी का समूचा क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पंजाब राज्य और केंद्र शासित चंडीगढ़ है। पंजाब पुनर्गठन एक्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी की देखभाल संबंधी घटती ग्रांट राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से क्रमवार 20: 20: 20: 40 के अनुपात में भरी जाती थी लेकिन राज्यों ने इस हिस्सेदारी से हाथ खींच लिए हैं। यहां तक कि हरियाणा सरकार ने तो अपने कॉलेजों की पंजाब यूनिवर्सिटी की मान्यता भी वापस ले ली है।
संथ की सरकार से मांग... पीयू में पंजाब के छात्र और कर्मचारियों के आरक्षण को भी सुनिश्चित करें
इस पर छात्र संगठन सथ का कहना है कि हाल ही में उनकी ओर से विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान से मुलाकात कर उनके और सीएम के पीयू के केंद्रीकरण के मुद्दे को सीएम के संज्ञान में लाया गया था। इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया सराहनीय है लेकिन सरकार पीयू में पंजाब के छात्र और कर्मचारियों के आरक्षण को भी सुनिश्चित करें।
वहीं पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) का कहना है कि पीयू के केंद्रीकरण के बजाय पंजाब सरकार को शिक्षकों के सातवें वेतनमान और उनकी आयु सीमा बढ़ाने को लेकर हल निकालना चाहिए। पीयू में पंजाब के छात्रों को आरक्षण दिया जाए जिससे उच्च शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।
प्रो. मनु शर्मा बोले- 40 प्रतिशत बजट हिस्सेदारी का वादा करे पंजाब सरकार
वहीं पुटा के चुनाव लड़ने वाले प्रो. मनु शर्मा ने कहा कि पीयू के शिक्षकों की दो मुख्य मांगें शिक्षकों का सातवां वेतनमान लागू करना और सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना है। चंडीगढ़ के कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों को 7वें वेतनमान के अनुसार वेतन मिल रहा है और 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
पीयू में कार्यरत शिक्षकों की इन दो प्रमुख मांगों पर मुख्यमंत्री के पत्र को शरारतपूर्ण ढंग से खामोश करना निराशाजनक है। पीयू के केंद्रीकरण होने पर शिक्षकों की ये दो मुख्य मांगें पूरी हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें खेद है कि मुख्यमंत्री ने पत्र में कहीं भी पीयू के बजट में 40 प्रतिशत अंशदान देने का आश्वासन नहीं दिया है। मुख्यमंत्री को पीयू के बजट में वित्तीय हिस्सेदारी 42 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का स्पष्ट रूप से वादा करना चाहिए था।
किसी कीमत पर नहीं होने देंगे पीयू का केंद्रीकरण: कंग
आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग का कहना है कि पीयू की प्रकृति और चरित्र में किसी भी तरह का बदलाव करने की केंद्र सरकार को इजाजत नहीं दी जाएगी। रविवार को पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कंग ने सीएम भगवंत मान द्वारा केंद्र को भेजे पत्र का भी जिक्र किया। कंग ने कांग्रेस और अकाली दल को पीयू को केंद्र के हाथों सौंपकर कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने के लिए केंद्र सरकार को अपनी सहमति दी थी। फिर पिछली कांग्रेस सरकार के कई नेता इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा 2021 में बनायी गई हाई पावर कमेटी का हिस्सा रहे लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया। कंग ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की विरासत का प्रतीक है। यूनिवर्सिटी में राज्य का नाम भी जुड़ा हुआ है। पंजाब सरकार 30 अगस्त को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में अपना जवाब मजबूती के साथ रखेगी।