पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सोमवार को कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा वहां के गुरुद्वारे के प्रबंध के लिए अलग कमेटी के लिए बनाया गया कानून अति भड़काऊ व देश के अल्पसंख्यक भाईचारे के धार्मिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है।
यह गैर संवैधनिक कदम कांग्रेस पार्टी द्वारा लंबे समय से खालसा पंथ में दरार डालकर इसकी आध्यात्मिक, सामाजिक तथा राजनीतिक शक्ति को समाप्त करने की रची जा रही साजिशों का एक हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको इस बात की समझ नहीं आ रही कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा को सिखों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी की जरूरत क्यों पड़ गई, जबकि वह एक धर्म निरपेक्ष सरकार के मुखी के तौर पर चुने गए हैं।
बादल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पूछा कि सिखों के धार्मिक मामलों में इस प्रकार खास व नापाक दिलचस्पी लेने के पीछे उनका क्या उदेश्य है। क्या उनको किसी ने यह नहीं बताया कि हरियाणा सरकार का यह कदम सिख मामलों में उसी प्रकार की दखलंदाजी है, जिस प्रकार के कामों के विरुद्ध पं. नेहरू जेल गए थे?
बादल ने कहा कि अपने कार्यों से हुड्डा यह सिद्ध करना चाहते हैं कि जो कुछ खालसा पंथ के विरुद्ध अंग्रेज सरकार करती रही, वह उससे भी अधिक कर सकते हैं।
बादल ने कहा कि हरियाणा सरकार को सोचना चाहिए था कि उसके इस कदम से इस क्षेत्र में बड़े प्रयासों के बाद लाई गई अमन शांति व भाईचारक सांझ को कितनी बड़ी चोट लग सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसजीपीसी संबंधी निर्णय लेने का अधिकार भारत सरकार के गृह मंत्रालय के घेरे में आता है।