पंजाब विधानसभा में सोमवार को मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी, अकाली दल और भाजपा के सदस्यों ने डीजीपी दिनकर गुप्ता और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु को बर्खास्त करने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। इसे सदन के कार्यवाही तीन बार बाधित हुई।
बजट सत्र के कामकाज के दूसरे दिन विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की। पहले दो बार सदन की कार्यवाही आधे-आधे घंटे के लिए स्थगित की। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा तो स्पीकर ने सभी विपक्षी सदस्यों को नेम करते हुए मार्शल को आदेश दिए कि उन्हें सदन से बाहर कर दिया जाए।
इस दौरान मार्शलों ने आप के विधायक जयकिशन रोढ़ी को उठाकर सदन से बाहर ले जाने की कोशिश की तो अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया के हस्तक्षेप करने पर मार्शल पीछे हट गए। इसके बाद 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। कार्यवाही शुरू होते ही यह मांग की गई कि नेम किए गए सदस्यों को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए। लेकिन स्पीकर ने यह आग्रह स्वीकार नहीं किया और भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष का आरोप- आशु के खिलाफ संगीन मामले
सोमवार को सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई थी। सदन में प्रश्नकाल शुरू होने के कुछ समय बाद ही आप और अकाली दल के सदस्यों ने डीजीपी गुप्ता द्वारा करतारपुर में दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं पर दिए बयान और एक निलंबित डीएसपी द्वारा मंत्री आशु पर आतंकियों से मिले होने के लगाए आरोपों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
सदन में इतना शोरगुल हो गया कि न प्रश्न सुने जा सके और न ही उनके उत्तर। हंगामे के बीच मात्र 11 मिनट चली कार्यवाही के बाद स्पीकर ने आधे घंटे के लिए सदन को स्थगित कर दिया। आधे घंटे बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने फिर मंत्री आशु पर लगाए आरोप का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मुकदमा नंबर 50 के अधीन आशु का इकबालिया बयान किसी कोर्ट में नहीं लगाया गया।
इसके अलावा उनके खिलाफ तीन अन्य मुकदमे भी हैं। इनमें तीन मुखबिर महिलाओं का कत्ल, लुधियाना गुड़ मंडी में बम विस्फोट और पंजाब पुलिस के एक हवलदार की हत्या जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। चीमा जब यह मामला उठा रहे थे, तब स्पीकर ने उन्हें अपनी बात कहकर बैठ जाने को कहा लेकिन उन्होंने इस मामले पर सरकार से जवाब की मांग की। इस दौरान स्पीकर कुछ कहना चाह रहे थे, लेकिन चीमा समेत आम आदमी पार्टी के सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए।
स्पीकर बोले- सदन के नेता मंगलवार को देंगे इस पर बयान
उधर, अकाली दल की सीटों से गुरशरण सिंह ढिल्लों ने करतारपुर कॉरिडोर पर डीजीपी के बयान का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार कॉरिडोर को बंद करना चाह रही है। उन्होंने भी इस मामले पर सरकार के जवाब की मांग की। स्पीकर ने उन्हें कहा कि मंगलवार को सदन के नेता इस पर बयान देंगे, तब तक शांति बनाए रखें।
लेकिन अकाली दल और भाजपा के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में पहुंच गए। यह सब कुछ सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के मात्र छह मिनट के भीतर ही हुआ और स्पीकर ने एक बार फिर से सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
कांग्रेसी-अकाली एक दूसरे को दिखाते रहे पोस्टर:
सदन में हंगामे के दौरान अकाली दल के सदस्य हाथों में पोस्टर लिए हुए थे। इनमें से कुछ पर लिखा था-मैं आतंकवादी नहीं हूं। कुछ फोटो वाले पोस्टर थे, जिनमें कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा एक गैंगस्टर के साथ दिखाई दे रहे थे। इस पोस्टर को देखकर सदन में बैठे रंधावा और अन्य कांग्रेसी सदस्य भड़क गए।
उन्होंने भी अपनी ओर से पोस्टर लहराने शुरू कर दिए जिनमें बिक्रम सिंह मजीठिया और नशा तस्करी में गिरफ्तार अनवर मसीह एक साथ दिखाई दे रहे थे। सदन में पूरा समय अकालियों और कांग्रेस सदस्यों के बीच मौखिक जंग उतनी नहीं हुई जितना कि पोस्टर वार का माहौल बना। काफी देर तक दोनों ओर से एक-दूसरे को पोस्टर दिखाए जाते रहे।
विधानसभा के बाहर भी डटे रहे
पंजाब विधानसभा में सोमवार को विपक्षी दल आम आदमी पार्टी और शिअद-भाजपा गठबंधन ने जहां सदन के भीतर जमकर हंगामा किया, वहीं विधानसभा परिसर में भी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर डीजीपी दिनकर गुप्ता और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु को हटाने की मांग की।
सोमवार को सत्र शुरू होने से पहले आम आदमी पार्टी के विधायकों ने पुलिस प्रमुख और पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आम आदमी पार्टी पार्टी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रमुख को हटाने की मांग कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी ने करतारपुर साहिब गलियारे के बारे में गलत बयान देकर सिख भावनाओं को आहत किया है। इसलिए डीजीपी दिनकर गुप्ता को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
अकाली विधायकों ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया था कि करतारपुर रोड को बंद करने की साजिश के पीछे गांधी परिवार था। अकाली विधायक दल के नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों और बिक्त्रस्म सिंह मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने साबित कर दिया है कि वह इंदिरा गांधी के नक्शेकदम पर चल रही है और सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सिखों से नफरत है।
उन्होंने कहा कि पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू ने करतारपुर साहिब को भारत का हिस्सा बनाने से इंकार कर दिया था और बाद में उनकी बेटी इंदिरा गांधी ने करतारपुर साहिब को पार करने के सिखों के अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया। अकाली दल ने मंत्री आशु को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि मंत्री ने लुधियाना में बमबारी, एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या, तीन महिलाओं की हत्या में उनकी संलिप्तता और आतंकवादियों की शरण के बारे में एक इकबालिया बयान दिया।
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जवाब देना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति को कैबिनेट मंत्री क्यों बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अकाली दल लोगों के पास जाएगा और इस मामले में आशु को बर्खास्त करने के अलावा कांग्रेस सरकार को उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेगी।
आप के बागी विधायक सदन में पहुंचे, लेकिन नारेबाजी से दूर रहे
पंजाब विधानसभा में सोमवार को आम आदमी पार्टी के बागी विधायक सुखपाल सिंह खैरा, कंवर संधू, मनशाईया भी नजर आए। वर्ष 2018 में पार्टी में पड़ी फूट के बाद यह पहला मौका था जब यह विधायक सदन में दिखाई दिए हैं। सभी आम आदमी पार्टी के बैंचों पर अपनी पुरानी सीटों पर बैठे।
सदन में आम आदमी पार्टी के सदस्य, नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व में दो अहम मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और काफी समय वेल भी खड़े रहे लेकिन इस दौरान उक्त बागी ?विधायक अपनी-अपनी सीटों पर बैठे रहे और उन्होंने अपनी (पुरानी) पार्टी के साथ नारेबाजी और हंगामे में हिस्सा नहीं लिया।
सोमवार को सदन की कार्यवाही जब स्थगन के बाद दूसरी बार शुरु हुई तो करीब पांच मिनट बाद ही आप के सदस्य उठकर वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। आप के सदस्य, डीजीपी दिनकर गुप्ता और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु संबंधी मामलों में दोनों को पद से बर्खास्त करने और इस मामले पर सरकार के जवाब की मांग कर रहे थे।
इस दौरान आप के बैंचों से कंवर संधू ने स्पीकर से मांग की कि अगर सदन के नेता मुख्यमंत्री मौजूद नहीं हैं तो संसदीय मामलों के मंत्री या अन्य कोई मंत्री इस मामले पर सदन में जवाब दे और माहौल का शांत किया जाए। लेकिन कंवर संधू के इस विचार पर असहमति जताते हुए स्पीकर ने कहा कि इन मामलों पर केवल मुख्यमंत्री ही जवाब दे सकते हैं और वे मंगलवार को जवाब देंगे। इसी दौरान, सुखपाल खैरा ने भी सदन का माहौल शांत करने के लिए यही मांग दोहराई कि सरकार का कोई मंत्री सदन में जवाब दे
। लेकिन स्पीकर ने उनकी मांग को भी अस्वीकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी से बगावत कर चुके विधायकों में से सुखपाल खैरा अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं जबकि मनशईया कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। वहीं खैरा के साथ जाने के कारण कंवर संधू पार्टी से निलंबित हैं। इन सभी बाकी विधायकों के इस्तीफे स्पीकर के विचाराधीन हैं।
सरकार ने माना कर्ज माफी मुकम्मल नहीं हुई
पंजाब सरकार ने आखिरकार मान लिया है कि उसके द्वारा तीन साल पहले शुरू की गई छोटे और मझोले किसानों की कर्जमाफी योजना पूरी तरह मुकम्मल नहीं हुई है। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राज कुमार चब्बेवाल द्वारा पूछा गया था कि क्या पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के कर्ज विभिन्न कारणों के चलते माफ होने बाकी रह गए हैं, को माफ करने की सरकार की कोई योजना है?
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या गैर कृषि खेत मजदूरों का कर्ज माफ करने की भी कोई योजना है? सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री का हवाला देते हुए सदन में बताया गया कि 17 अक्तूबर 2017 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, कर्ज माफी संबंधी बाकी मामलों का जल्दी ही निपटारा किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सूबे के गैर कृषि खेत मजदूरों, जो सहकारी कृषि संभाओं से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने जिला सहकारी बैंकों से कर्ज लिया हुआ है, का कर्ज माफ करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है।