पंजाब के बाद अब चंडीगढ़ को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके लिए चार नाम प्रस्तावित हैं, जिन पर मंथन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह तक चंडीगढ़ के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नए अध्यक्ष के लिए सतिंदर सिंह, राजेश गुप्ता, सौरभ जोशी और देवेश मोदगिल के नाम पर मंथन कर चुकी है। नए अध्यक्ष की घोषणा इनमें से ही किसी के नाम पर हो सकती है।
इससे पहले पिछले रविवार को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई थी तो कयास लगाए जा रहे थे इस साल होने वाले नगर निगम चुनाव तक वर्तमान अध्यक्ष संजय टंडन का कार्यकाल रहेगा। लेकिन भाजपा हाईकमान शहर के नेताओं के बीच भारी गुटबाजी के कारण टंडन का कार्यकाल नहीं बढ़ाना चाहती है। पार्टी प्रभारी प्रभात झा ने चंडीगढ़ के नए अध्यक्ष और यहां की रणनीति की जानकारी अपनी राय के साथ पार्टी को दी है। मालूम हो कि झा पंजाब भाजपा के भी प्रभारी हैं।
शुक्रवार को भाजपा ने जिन पांच प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की है, उनमें पंजाब से विजय सांपला, यूपी से केशव प्रसाद मौर्य, कनार्टक से बीएस येदियुरप्पा, तेलंगाना से डॉ. के लक्ष्मण और अरुणाचल से तापिर गाओ के नाम शामिल हैं। नवनियुक्त राज्यों के पार्टी अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही शहर में भाजपा की राजनीति भी तेज हो गई है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने दिल्ली संपर्क करने शुरू कर दिया है।
खेर सतिंदर या जोशी को बनाना चाहती हैं अध्यक्ष
पार्टी के नए अध्यक्ष के तौर पर सांसद किरण खेर ने सतिंदर सिंह और सौरभ जोशी का नाम दिया है। जबकि पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल का नाम दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने सतिंदर सिंह का नाम दिया है। जबकि भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने राजेश गुप्ता और आशा जसवाल का नाम दिया है। हाईकमान 50 साल से कम आयु के किसी नेता को अध्यक्ष बनाना चाहता है।
क्यों अहम है नया अध्यक्ष
इस साल के अंत में नगर निगम चुनाव हैं इसलिए नए प्रदेश अध्यक्ष का पद काफी महत्वपूर्ण हो गया है। नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण में नए अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है। जो भी अध्यक्ष बनेगा वह अपने करीबियों को टिकट देगा।
टंडन को तीसरी बार नहीं बनाया जा सकता है अध्यक्ष
संजय टंडन का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो चुका है। संविधान के अनुसार टंडन तीसरी बार अध्यक्ष नहीं सकते हैं। वह पिछले छह साल से अध्यक्ष हैं। इससे पहले मेयर चुनाव से पहले ही नए अध्यक्ष का चुनाव होने की उम्मीद थी। लेकिन गुटबाजी के कारण इसे मेयर चुनाव जीतने तक टाल दिया गया था।