पंजाब भाजपा ने बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के खिलाफ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का सोमवार को बहिष्कार किया। पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोरंजन कालिया ने कहा कि मुख्यमंत्री चन्नी को इसके बजाय कांग्रेस सरकार द्वारा पंजाब में बह रहे नशे के दरिया की रोकथाम में विफल रहने और कांग्रेस की ओर से 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी, क्योंकि कांग्रेस सरकार ने पवित्र गुटका साहिब हाथ में लेकर कसम खाई थी।
कालिया ने शिअद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2007 से 2017 तक नशीले पदार्थों के खतरे की जांच के लिए गृह मंत्री के रूप में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की विफलता पर भी चर्चा की जानी चाहिए। मनोरंजन कालिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीएसएफ अधिनियम 1968 के तहत ऑपरेशन के क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया है, जिसे कांग्रेस सरकार के शासन के दौरान पारित किया गया था, ताकि नारकोटिक्स, अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं, विदेशियों के अवैध प्रवेश और तस्करी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान की ओर से अवैध गतिविधियों में उन्नत तकनीकों के उपयोग के कारण बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाना आवश्यक हो गया है।
कालिया ने दावा किया कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ने से पंजाब पुलिस के अधिकार क्षेत्र में कोई कमी नहीं आएगी। अधिसूचना का एकमात्र उद्देश्य बीएसएफ की परिचालन दक्षता में सुधार करना है। बीएसएफ की ओर से एक संदिग्ध को हिरासत में लिए जाने या अधिकार क्षेत्र के भीतर एक खेप जब्त किए जाने के बाद बीएसएफ केवल प्रारंभिक पूछताछ कर सकती है और उसे 24 घंटे में संदिग्ध को पंजाब पुलिस को सौंपना होगा। बीएसएफ के पास संदिग्धों पर मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है। स्थानीय पुलिस भी बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई कर सकती है।