सुखना लेक की वीड और गाद की समस्या से निपटने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहमदाबाद की साबरमती झील की सफाई प्रक्रिया से सीखने की प्रशासन को सलाह दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह सफाई एक निरंतर प्रोसेस है और ऐसे में इसे मैनुअल करने केस्थान पर इसके लिए मशीनों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस पर अगली सुनवाई के दौरान प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से सुखना पर जवाब मांगा। प्रशासन की ओर से कहा गया कि वे वर्तमान में कई संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं जिससे सुखना में पानी की कमी न हो। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि अक्सर जब लेक पर निरीक्षण के लिए जाते हैं तो लोग सफाई के लिए लगा दिए जाते हैं। मैनुअल तौर पर इस काम को करना व्यर्थ है। दुनिया के कई देशों में बड़ी मशीनें मौजूद हैं जो इस काम को करती हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल रेगुलर तौर पर होता है इसलिए इनकी खरीद करने पर प्रशासन को विचार करना चाहिए।
लेक पर लगाएं दो वाटर कुलर
इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि सुखना लेक पर पीने के पानी और टायलेट की कमी है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए दो वाटर कूलर लगाने और अतिरिक्त टॉयलेट स्थापित करने की संभावना पर विचार करने के आदेश दिए। इसके साथ ही लेक पर स्ट्रे डॉग्स का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर प्रशासन और एमसी दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि कुत्तों को वहां से हटाया नहीं जा सकता। इस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर एमिकस क्यूरी तनु बेदी को पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।