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Punjab and Haryana High Court : बहू को ससुराल से निकालने का आदेश अवैध नहीं, घरेलू हिंसा कानून नहीं है बाधा

Thu, 13 Oct 2022 02:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार


Punjab and Haryana High Court: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि घरेलू हिंसा कानून के बावजूद बहू को ससुराल से निकालने पर कोई पाबंदी नहीं है। कोर्ट ने यह आदेश गुरुग्राम निवासी महिला की याचिका को खारिज करते हुए जारी किया है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि घरेलू हिंसा कानून के बावजूद बहू को ससुराल से निकालने पर कोई पाबंदी नहीं है। कोर्ट ने यह आदेश गुरुग्राम निवासी महिला की याचिका को खारिज करते हुए जारी किया है।

याचिका दाखिल करते हुए महिला ने बताया कि उसके सास-ससुर ने मेंटेनेंस ऑफ पेरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर ट्रिब्यूनल ने याची को एक्स पार्टी करार देते हुए उसके खिलाफ फैसला सुनाया और उसे घर खाली करने का आदेश दे दिया।
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याची ने बताया कि इस मामले में याची को एक्स पार्टी घोषित करने के आदेश के खिलाफ दाखिल अर्जी भी खाली कर दी गई। याची ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून के तहत याची को उसकी ससुराल से नहीं निकाला जा सकता है। याची के सास-ससुर ने कहा कि याची को उनके घर में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

याची के व्यभिचार के कारण पूरे घर का माहौल खराब होता है। याची का एक व्यक्ति से अवैध संबंध है और याची ने गुरुग्राम पुलिस को शिकायत दी थी कि उस व्यक्ति के पास याची की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची को ससुराल में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
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याची को सास-ससुर प्रतिमाह 40 हजार रुपये गुजारा भत्ता दे रहे हैं। याची ने घरेलू हिंसा कानून के तहत निचली अदालत में शिकायत देकर अपने कानूनी अधिकार का भी प्रयोग कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि याची सुप्रीम कोर्ट के जिस केस की दलील दे रही है उसमें कोर्ट ने बहू को एक साल का समय दिया था ताकि वह अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर सके। इस मामले में याची पहले ही ऐसा कर चुकी है। ऐसे में कोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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