Chandigarh : सात साल पुराने हुए कोटकपूरा गोलीकांड की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद बादल ने कहा कि वह भी चाहते हैं मामले की सच्चाई सामने आए। इस मामले में पीड़ितों को इंसाफ मिलना चाहिए।
सात साल पुराने हुए कोटकपूरा गोलीकांड की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद बादल ने कहा कि वह भी चाहते हैं मामले की सच्चाई सामने आए। इस मामले में पीड़ितों को इंसाफ मिलना चाहिए। उन्हें कानून में पूरा विश्वास है। भविष्य में अगर एसआईटी को उनकी कहीं जरूरत पड़ती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे।
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एसआईटी ने पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस दिया था। एडीजीपी एलके यादव की अगुवाई में गठित एसआईटी की टीम बुधवार को सुबह 11 बजे सेक्टर-9 स्थित प्रकाश सिंह बादल के चंडीगढ़ निवास पर पहुंची। साल 2015 के कोटकपूरा गोलीकांड मामले की जांच कर रही एसआईटी ने मंगलवार को कोटकपूरा के मुख्य चौक का दौरा किया था। एसआईटी की चार गाड़ियां सीधे उनके निवास स्थान के भीतर चली गईं।
इसके बाद बाहर गेट को बंद कर दिया गया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक पूछताछ का दौर चला। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद यह पहला मौका था जब प्रकाश सिंह बादल से पूछताछ की गई। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री की तबीयत ठीक नहीं थी, फिर भी उन्होंने जांच में पूरा सहयोग दिया।
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आखिर किसने ने दिए थे गोली चलाने के आदेश...
एसआईटी के सवालों में, उस समय गोली चलाने के आदेश किसकी तरफ से दिए गए थे। गोली चलाने की वजह क्या बनी थी। जब गोलियां चलने का मामला सामने आया था तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की गई थी। सूत्रों की माने तो इससे जुड़े सवाल ही किए गए। पूछताछ काफी बढ़िया माहौल में हुई है। हालांकि एसआईटी उनके जवाबों से कितना संतुष्ट है यह चीज तो आने वाला समय ही बताएगा। इससे पहले कांग्रेस सरकार के समय में भी उनसे पूछताछ हुई थी।
हाईकोर्ट के आदेश पर गठित हुई नई एसआईटी
2021 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तत्कालीन आईजी कुंवर विजय प्रताप की जांच रिपोर्ट को रद्द कर दिया था और सरकार को नई एसआईटी बनाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एडीजीपी एलके यादव की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। अब यही एसआईटी मामले की जांच कर रही है।
तीन मुख्यमंत्री बदले नहीं आई सच्चाई सामने
कोटकपूरा मामला साल 2015 में सामने आया था। इसमें दो एफआईआर दर्ज हुई थी। 14 अक्तूबर को इस मामले में एक और साल बढ़ जाएगा। इस समय अवधि में अब तक तीन मुख्यमंत्री बदल चुके हैं लेकिन मामले की सच्चाई सामने नहीं आई है। हालांकि मौजूदा सरकार ने दलील थी कि सत्ता में आते ही सारी सच्चाई को सामने लाया जाएगा।