प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली सुखपाल खैरा की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ईडी को 29 नवंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। खैरा ने गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई को सियासी रंजिश का परिणाम बताया है।
सुखपाल खैरा ने सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी के जरिये याचिका दाखिल कर बताया कि उनकी यह गिरफ्तारी न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर की गई है, बल्कि सत्ता पक्ष ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है। ऐसे में खैरा ने गिरफ्तारी के आदेश और इस प्रक्रिया को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की है।
खैरा ने याचिका में कहा है कि यह मामला 2015 का है, जब इस एनडीपीएस केस में ट्रायल के लगभग पूरा होने के बाद 2017 में उन्हें अतिरिक्त आरोपी बनाकर समन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने समन के आदेश पर रोक लगा दी थी। यह केस अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। याची ने बताया कि किसान आंदोलन के दौरान जब उन्होंने केंद्र सरकार का विरोध किया था तो उनके घर पर ईडी ने छापा मारा। इस दौरान उनका फोन तक जब्त कर लिया गया, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो विचाराधीन है।
पंजाब विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं तो ईडी ने गत सप्ताह उन्हें गिरफ्तार कर लिया। खैरा ने कहा कि ईडी की ओर से 11 बार भेजे गए हर समन के आदेश का उन्होंने पालन किया है और पूछताछ में शामिल होते रहे हैं। ग्यारवीं बार समन पर पूछताछ के लिए पेश हुए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रंजिश का परिणाम है। खैरा ने अपनी गिरफ्तारी और इस पूरी प्रक्रिया को अवैध करार दे रद्द करने की मांग की है।