पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी नाबालिग को जमानत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता किसी नाबालिग को जमानत देने से इनकार का आधार नहीं हो सकती है। पंजाब के संगरूर निवासी नाबालिग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए नियमित जमानत की मांग की थी।
याची ने बताया कि पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोप में 11 नवंबर, 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद उसने जमानत के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष याचिका दाखिल की थी, जिसे बोर्ड ने 19 नवंबर को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उसने सेशन कोर्ट में अपील की लेकिन एडिशनल सेशन जज ने 24 दिसंबर को उसकी अपील खारिज कर दी। अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याची ने कहा कि इस मामले में निचली अदालत ने आधार यह बनाया है कि बच्ची पांच साल की थी और याची के गांव की थी ऐसे में जमानत देने से न्याय का अंत होगा। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि नाबालिग को तब तक जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता जब तक यह साबित न हो कि जमानत उसे नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में डाल देगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग की जमानत के मामले में अपराध की गंभीरता को आधार बनाया ही नहीं जा सकता है। इस मामले में निचली अदालत ने अपने फैसले में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया कि जमानत उसे नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में डाल देगी। ऐसे में अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने याची को सशर्त जमानत दे दी।