हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका का दायरा बढ़ा दिया और कहा कि लगातार ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, जहां बाद में पीड़िता आरोपों से मुकर जाती है। ऐसे में एक ओर पीड़िता पर दबाव न बने और दूसरी ओर कोई बेकसूर सेक्सटॉर्शन का शिकार न हो इसके लिए कुछ दिशा निर्देश हाईकोर्ट ने जारी किए हैं और आदेश की प्रति हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी को सौंपने का निर्देश दिया है।
- दुष्कर्म के मामले में पीड़िता के मुकरने पर जांच अधिकारी एक रिपोर्ट एसपी को भेजेगा और एसपी मामले की जांच खुद करेंगे या किसी अन्य अधिकारी को सौंपेगे।
- ऐसे मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट तैयार करते हुए यह जांच की जाए कि कहीं कोई समझौता तो नहीं हुआ और क्या पैसे का लेन-देन तो नहीं हुआ
- केस का फैसला होने पर तय समय के भीतर शिकायतकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- अगर कार्रवाई न करने का निर्णय लिया गया है तो इसके लिए एसपी लिखित में डीजीपी को रिपोर्ट देंगे और अंतिम निर्णय डीजीपी का होगा।
- अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो इसके लिए दोषी अधिकारी की सर्विस बुक में इसकी एंट्री की जाएगी।
सुरक्षा के लिए बने कानूनों को बनाया हथियार
हाईकोर्ट ने कहा कि यह निराशाजनक है कि हमारे दंडात्मक कानून, जो यौन उत्पीड़न को रोकने के इरादे से बने थे उन्हें कुछ बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा जनता से धन उगाही करने के लिए हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इसे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे सिस्टम में अराजकता फैल जाएगी। यह यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराध का उपहास करना होगा।