पंजाब में फर्जी एनकाउंटर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज केस के खिलाफ विभिन्न पुलिस अधिकारियों की याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। अब जिन मामलों में हाईकोर्ट में याचिका लंबित रहते ट्रायल पर रोक लगी थी, उन पर दोबारा सुनवाई आरंभ होगी। ऐसे में बड़ी संख्या में अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
हाईकोर्ट में दाखिल विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से सीबीआई द्वारा पंजाब में फर्जी मुठभेड़ों को लेकर जम्मू-कश्मीर में दर्ज केस को चुनौती दी गई थी। याचिका में बताया गया कि पटियाला की सीबीआई कोर्ट ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें केस के जम्मू-कश्मीर में दर्ज होने की बात कही गई थी।
याचिका में कहा गया कि मामले पंजाब के हैं, जबकि सीबीआई ने केस जम्मू-कश्मीर में दर्ज किया है। ऐसे में यह जम्मू-कश्मीर सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि केस जम्मू-कश्मीर में दर्ज हुआ तो पटियाला की सीबीआई अदालत इसे कैसे सुन सकती है।
अर्जियों में चार्टशीट खारिज करने की तथा केस को समाप्त करने की अपील की गई थी। सीबीआई कोर्ट ने इन सभी अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया था और सीबीआई की कार्रवाई को सही करार दिया था। इस फैसले के खिलाफ सभी पुलिस अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सीबीआई की कुछ विशेष विंग होती हैं, जिनका अधिकार क्षेत्र पूरा देश है। ऐसे में यह कहना गलत है कि सीबीआई ने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर एफआईआर दर्ज की है।
यह था मामला
पंजाब पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में लावारिस लाशों के दाह संस्कार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 15 नवंबर 1995 को प्राथमिक जांच का आदेश दिया था। आदेश के अनुरूप प्राथमिक जांच के बाद 1997 में एफआईआर दर्ज की गई थी और 1999 में चालान पेश कर दिया गया था। तब से लेकर अब तक इन मामलों में विभिन्न कारणों से ट्रायल लंबित रहे।