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बिना अधिसूचना रख दी पीयू सीनेट की बैठक, घमासान

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव की बैठक आठ जनवरी को रखते ही घमासान मच गया। गोयल ग्रुप ने पीयू के अफसरों को कटघरे में खड़ा किया है। आरोप लगाया है कि भाजपा का खेमा नहीं चाहता कि सीनेट में लोकतंत्र पसंद लोग आएं, इसीलिए उनकी अधिसूचना नहीं करवाई। प्रायोजित तरीके से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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गोयल ग्रुप ने कहा है कि पीयू के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। सीनेट का गठन होने के बाद सिंडिकेट बनती है और उसके बाद बैठक का आयोजन होता है। वहीं, दूसरी ओर पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों ने भी इस पर एतराज जताया है। आरोप लगाए हैं कि यह मनमानी करने जैसा निर्णय है। अब सीनेट बैठक को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है।
पीयू सीनेट के चुनाव से लेकर अब तक की प्रक्रिया मजाक बनकर रह गई है। पहले चुनाव नहीं करवाए गए। हाईकोर्ट ने दखल दिया तो चुनाव हुए। चुनाव भी चरणवार तरीके से हुए। चुनाव से पहले ही मनोनीत सदस्यों की अधिसूचना हो गई। बाकी कुछ लोगों की दूसरे चरण में अधिसूचना हुई। अब भी 14 सदस्यों की अधिसूचना होना बाकी है। इसी बीच सीनेट की बैठक आठ जनवरी को रख दी गई। बैठक की सूचना आते ही पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों ने इस पर एतराज जताया। यहां तक कि पुटा के पदाधिकारियों ने भी इस पर हैरत जताई। कहा कि विश्वविद्यालय के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकारी मशीनरी का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बैठक को लेकर गोयल ग्रुप फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में है। बैठक बिना पूरी सीनेट के नहीं हो सकती।
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दो साल में लिए गए निर्णयों पर लगेगी मुहर
पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि गोयल ग्रुप के कुछ लोगों को सीनेट की बैठक से दूर करके वह प्रस्ताव पास करने की तैयारी में हैं, जो पहले पीयू के उच्चाधिकारियों की ओर से सीनेट की अनुपस्थिति में लिए गए थे। गोयल ग्रुप ने पहले ही कई प्रस्तावों पर विरोध दर्ज करवाया था। कहा था कि उच्चाधिकारी मनमानी कर रहे हैं। ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जो पीयू के हित में नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि गोयल ग्रुप बैठक में शामिल होगा तो जमकर विरोध होगा। ऐसे में दूरी ही जरूरी समझी गई है।
सूत्रों का कहना है कि भले ही पीयू ने बैठक आयोजित कर दी हो, लेकिन यह होती नजर नहीं आएगी। इसके लिए रास्ते निकाले जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर पीयू का कहना है कि कुछ शिक्षकों की अधिसूचना इसलिए नहीं हो पाई कि कानूनी प्रक्रियाएं लंबित हैं। जैसे ही कानूनी पेंच या शिकायतों का निस्तारण हो जाएगा तो अधिसूचना जारी हो जाएगी।
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