चंडीगढ़। कोरोना के कारण सीनेट चुनाव पर भी असर पड़ा। कई बार इसकी तिथियां घोषित की गईं, अभी भी पंजाब विश्वविद्यालय सीनट के स्नातक वर्ग का चुनाव होना बाकी है। अब इसके लिए 26 सितंबर की तिथि प्रस्तावित की गई है, लेकिन यह तभी हो पाएगा, जब चांसलर इसे अनुमति देंगे।
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में चुनाव करवाने के लिए पीयू को अभी तक अनुमति नहीं मिली है। बिना अनुमति के यहां चुनाव करवाना संभव नहीं हो सकेगा। इसी के साथ पीयू ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं जानकारों का कहना है कि इस तिथि में चुनाव होना संभव नहीं दिख रहा है।
स्नातक वर्ग चुनाव पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के अलावा राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड आदि प्रदेशों में होते हैं। इसके लिए पीयू की ओर से बूथ बनाए जाते हैं। सरकारी मशीनरी को चुनाव में लगाया जाता है। पीयू के शिक्षक व कर्मचारी दूसरे राज्यों में जाते हैं। सर्वाधिक मतदाता इसी वर्ग के चुनाव में हिस्सा लेते हैं। इस बार भी साढ़े तीन लाख से अधिक मतदाता इस चुनाव में भाग लेंगे, जो 43 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। हालांकि 15 ही सदस्यों का चुनाव होगा।
दिल्ली से इस तरह मिली अनुमति
इस चुनाव की पीयू ने दो बार तिथियां घोषित कीं, लेकिन कुछ राज्यों से बूथ बनाने की अनुमति नहीं मिल सकी। इसका कारण कोरोना भी रहा है। दिल्ली से अनुमति नहीं मिल पाई थी जो अब मिल गई है। सूत्रों का कहना है कि आम आदमी पार्टी के एक नेता से एक कार्यक्रम के दौरान सवाल पूछ लिया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही चुनाव के लिए अनुमति दिलाएंगे। उनके आश्वासन के पांच दिन बात यह अनुमति मिल गई। अब पीयू उत्तराखंड की अनुमति का इंतजार कर रही है।
मनोनीत सदस्यों की सूची में हो सकती है देरी
सूत्रों का कहना है कि स्नातक चुनाव यदि 26 सितंबर को हो भी गया तो मनोनीत सदस्यों की सूची जल्दी जारी नहीं होगी। बताया जाता है कि सूची में कई नाम फाइनल नहीं हुए हैं। तमाम लोग लाइन में लगे हैं। कुछ सरकार के चहेते हैं तो कुछ बाहरी भी, जो दूसरे दलों से संबंध रखते हैं। यदि सूची में एक दल के 30 या इससे अधिक सदस्य हुए तो यह जल्द जारी हो सकती है, अन्यथा इसमें समय लग सकता है। इससे सीनेट के गठन में देरी हो सकती है।