पंजाब विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बेजान बीजों में जान डालकर दुनिया का सबसे सुंदर फूल आर्किड उगाने में सफलता हासिल की है। दो दशक तक चले इस शोध में वैज्ञानिकों ने आर्किड की 100 से अधिक प्रजातियों के बीज टेस्ट ट्यूब तकनीक से तैयार कर लिए हैं। अब यह कवायद चल रही है कि इन बीजों को कैसे बाजार में लाया जाए ताकि लोग खेत व घरों में आर्किड का फूल उगा सकें।
वैज्ञानिकों का दावा है कि जल्द ही इसमें भी सफलता मिलेगी। वैज्ञानिकों की इसी टीम ने कुछ दिनों पहले टेस्ट ट्यूब तकनीक से आर्किड का फूल उगाया था। खास बात यह है कि यह फूल तीन से नौ माह के बीच तैयार हो गया जबकि इसको तैयार होने में करीब 12 साल लगते थे।
पीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. प्रोमिला पाठक और उनकी टीम को यह सफलता दो दशक के शोध के बाद मिली है। टीम के मुताबिक, एक आर्किड के फूल से लाखों बीज निकलते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंख से नजर नहीं आते। इन्हें माइक्रोस्कोप से देखना पड़ता है। इन लाखों बीजों में से एक या दो ही खुद को जीवित रख पाते हैं क्योंकि इनमें पोषक तत्व नहीं होते।
पोषक तत्व नहीं होने से ये बीज जमीन में उगते ही नहीं। इसी पर पीयू की टीम ने शोध किया। वैज्ञानिकों ने आर्किड की कई प्रजातियों के बीजों को टेस्ट ट्यूब तकनीक से पोषित करने का काम शुरू किया। इस दौरान कई बार टीम के हाथ निराशा लगी लेकिन जो कमियां मिलती गईं, उनको दूर कर वैज्ञानिकों की टीम दिन-रात जुटी रही और आखिरकार सफलता मिल गई। टेस्ट ट्यूब तकनीक से बीज को पोषित कर लिया गया, जिसके बाद इन बीजों से पौधे तैयार हो गए। बता दें कि आर्किड सबसे सुंदर फूल है, जिसका व्यापार पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर होता है।
वैज्ञानिकों ने इन प्रजातियों के बीज तैयार किए
वैज्ञानिकों ने आर्किड की अरुनदिना बनबुसिफोलिया, मलेक्सिस एक्यूमिनाटा, मलेक्सिस मस्किफेरा, हेबिनारिया आदि प्रजातियों के बीज टेस्ट ट्यूब तकनीक से तैयार किए हैं। उनका कहना है कि अन्य फसलों की तरह आर्किड का बीज भी बाजार में लाना है। अब इस पर काम चल रहा है। बीज जैसे ही बाजार में आएगा, नई क्रांति आ जाएगी। इसे आसानी से उगाया जा सकेगा और फिर यह दुर्लभ भी नहीं रहेगा। यह सफलता जल्द मिलेगी।
यहां-यहां से जुटाए गए आर्किड के बेजान बीज
प्रो. प्रोमिला पाठक के साथ शोधार्थी बबीता, अंकुश, अनामिका, प्रतिभा, वैली आदि ने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, शिलांग, नगालैंड, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा किया। दुर्गम इलाकों में जाकर आर्किड के पौधे ढूंढकर उनके फूल देखे और बीजों को तलाश किया।
आर्किड के बीज बेजान होते हैं। इन बीजों को पोषक तत्व आदि देकर उगाया गया है। लंबे शोध के बाद सफलता हाथ लगी है। हमारी कोशिश है कि आर्किड के ये बीज बाजार में आएं और अन्य फसलों की तरह उगाए जाएं। हमारी टीम दिन-रात इस कार्य में जुटी है। - प्रो. प्रोमिला पाठक, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़