चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय छोटे विभागों के विलय पर फैसला नहीं ले पाया जबकि छह साल पहले इसकी संस्तुति नैक की टीम ने की थी। एक माह पहले इसके लिए बनाई गई कमेटी ने विलय की संस्तुति करके उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी थी, लेकिन उस पर मुहर नहीं लग पाई। जानकारों का कहना है कि नैक की टीम का दौरा अगले साल होगा। ऐसे में पीयू को इससे नुकसान हो सकता है।
नैक की टीम 2015 में पहुंची थी। टीम के सदस्यों ने विभागों का दौरा किया। उस दौरान छोटे-छोटे विभाग पाए गए। टीम ने कहा था कि छोटे विभागों का विलय उनसे संबंधित विभागों में कर दिया जाए। पीयू ने इस बात को समझकर उस दौरान कमेटी भी बनाई। सुझावों के मुताबिक काम भी किया गया, लेकिन वह परवान नहीं चढ़ पाया। उसके बाद से मामला टलता गया।
छोटे विभागों का विलय न किया तो नीचे जा सकती है नैक की ग्रेडिंग
सूत्रों का कहना है कि छोटे विभाग के अध्यक्ष भी प्रभावशाली हैं। वे अपने कार्यकाल को बेहतर देखना चाहते हैं, इसलिए विलय का विरोध भी कर रहे हैं। हालांकि पूरा खाका तैयार है। इसे मंजूरी का इंतजार है। यदि पीयू ने इस पर काम नहीं किया तो नैक की ग्रेडिंग नीचे जा सकती है।