कांग्रेस विधायकों ने कई मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सरकारी आवास पर धरना दिया। सीएम ने घर के बाहर आकर उनकी मांगें सुनीं और मांग पत्र लिया। कांग्रेसियों ने 15 जुलाई को शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले मुद्दे हल करने की मांग की।
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सीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि सभी मसले जल्द हल किए जाएंगे। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष का सरकार के खिलाफ यह पहला आंदोलन था।
कांग्रेस के सभी विधायक पहले सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ की सीएम आवास के साथ स्थित कोठी में इकट्ठे हुए। सुबह 11.40 बजे सभी जाखड़ और प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा की अगुवाई में नारेबाजी करते हुए सीएम आवास की तरफ बढ़े। रास्ते में पुलिस ने बैरिकेड्स लगा रखे थे।
कांग्रेसियों ने बैरिकेड्स हटा दिए और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की करते हुए सीएम आवास तक पहुंच गए। वहां सभी ने धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी।
बाहर आकर सीएम बादल ने सुनी समस्याएं
कांग्रेसियों के पहुंचने के दो मिनट के अंदर शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा बाहर आए और विधायकों से बात की। इसके तुरंत बाद सीएम प्रकाश सिंह बादल खुद बाहर आए और सभी को अंदर चल कर चाय पीने का न्योता दिया।
कांग्रेसियों के स्वीकार न करने के बाद बादल अंदर चले गए तो विधायकों ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। 11.54 बजे बादल फिर बाहर आए। इस बार जाखड़ ने उन्हें सारी मांगें सुनाईं। साथ ही कहा कि उन्हें भरोसा है कि सत्र से पहले यह पूरी हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार सभी मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद धरना समाप्त हो गया।
दो विधायकों अश्वनी सेखड़ी और राकेश पांडे ने कहा कि अफसरशाही बात नहीं सुनती। सीएम ने कहा कि सभी को सुनवाई के निर्देश दिए जाएंगे। धरने में 32 विधायक शामिल हुए।
लोगों ने भी नशों के खिलाफ फतवा दिया
मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांगपत्र में कांग्रेस ने पांच मुद्दे उठाए हैं। सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ ने कहा कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार एक तरफ फसली विभिन्नता को प्रोत्साहित करने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ गन्ना उत्पादक किसानों का पिछले सीजन का 183 करोड़ रुपये बकाया पड़ा है। उसकी जल्द अदायगी की जाए।
अब एनडीए की सरकार है तो प्रॉपर्टी टैक्स को फौरन हटाया जाए। समाज भलाई की स्कीमों की राशि लंबे समय से जारी नहीं की गई है, उसे जल्द रिलीज किया जाए। नशों केमुद्दे पर कांग्रेस शुरू से कह रही है, अब भाजपा ने भी मान लिया है। सबसे बड़ी बात है कि चुनाव में लोगों ने भी इस मुद्दे पर फतवा दे दिया है।
इस मामले में कार्रवाई की जाए। साथी विधायकों ने बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम बोला, पर जाखड़ ने उनका नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर सुनील जाखड़ इस कारोबार में शामिल हो, कोई भी कांग्रेसी, अकाली या भाजपाई शामिल हो, उस पर कार्रवाई की जाए। नशेड़ियों पर कार्रवाई के बजाए कारोबारियों को पकड़ा जाए। कांग्रेस ने विधानसभा सत्र का समय बढ़ाने की भी मांग की।
बादल बोले, सारे वजीरों को अंदर नहीं कर सकता
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि उन्होंने तो कहा था कि अंदर बैठ कर चाय पीते हुए बात करते हैं। पर ये नहीं माने, इनकी भी मजबूरियां होती हैं। अच्छे ढंग से स्वागत भी नहीं कर सके। धरने के बजाय उनके घर आते तो खुशी होती। बादल ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि विपक्ष राज्य के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
उन्होंने हमेशा स्वस्थ आलोचना का स्वागत किया है, लेकिन अनावश्यक आलोचना नहीं होनी चाहिए। नशों के मुद्दों पर उन्होंने कहा कि सारे वजीरों को पकड़ कर अंदर नहीं कर सकता। एक मंत्री ने इस्तीफा दिया है। कांग्रेस सबूतों समेत आए, फिर जिस पुलिस अधिकारी को कहेंगे, जांच सौंप देंगे। आधारहीन आरोप न लगाएं।
बादल ने कहा कि समाज भलाई स्कीमों को पूरी तरह जांचा जाएगा, जिससे कमजोर वर्ग के कल्याण के लिए रखे फंड लाभपात्रियों को मिल सकें। गन्ना उत्पादकों के बकाये की भी जल्द जांच की जाएगी। बिना देरी भुगतान यकीनी बनाया जाएगा।
धरने की कॉल सीएलपी ने दी थी। पर सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा भी धरने में पहुंचे। हालांकि बाजवा पूरी तरह बैकफुट पर ही रहे, कमान सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ के हाथ में ही रही। जाखड़ की कोठी से निकलते समय भी बाजवा सबसे पीछे रहे।
सीएम आवास तक जाते समय भी वह विधायकों से पीछे थे। धरने में भी वह आगे नहीं आए। बाद में जाखड़ ने ही सीएम को मांगें सुनाई आखिर में जाखड़ के कहने पर वह मांगपत्र देने जरूर गए।
सूत्रों के मुताबिक जाखड़ ने औपचारिक तौर पर बाजवा को धरने में बुलाया ही नहीं था। एक दिन पहले हाईकमान ने इसका नोटिस लेते हुए जाखड़ को हिदायत दी। जिसके बाद उन्होंने बाजवा को फोन किया। औपचारिकता निभाते हुए बाजवा धरने में पहुंच तो गए, पर आगे नहीं आए।