प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत बांटे जा रहे राशन को लेकर प्रशासन के खाद्य व आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। शहर में कई ऐसे लोग सामने आए हैं, जिन्हें राशन नहीं मिला, लेकिन राशन बांटने वाले अधिकारियों का कहना है कि उनके आधार कार्ड पर किसी ने राशन ले लिया है।
आरोप है कि अधिकारी निजी एजेंसी के कर्मचारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इसे लेकर अब विजिलेंस जांच की मांग करते हुए पीएमओ से भी शिकायत की गई है। इस बारे में चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा से भी शिकायत की गई है।
मलोया के कम्युनिटी सेंटर में मंगलवार को दो ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कार्ड धारक ने राशन लिया ही नहीं, लेकिन उनके कार्ड पर राशन जा चुका है। इस पर लोगों ने काफी हंगामा किया। लोगों ने वहां पर काम कर रहे कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उनकी मिलीभगत की वजह से कई लोगों का राशन गायब किया जा रहा है।
लोगों ने कहा कि जब उनका आधार और राशन कार्ड उनके पास है। उनके परिवार के किसी सदस्य ने राशन नहीं लिया तो कैसे उनके कार्ड पर किसी और ने राशन ले लिया। इसे लेकर स्थानीय लोगों की तरफ से कम्युनिटी सेंटर में खाद्य व आपूर्ति विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
स्थानीय नेता राजिंदर यादव ने कहा कि विभाग के कर्मचारी गरीब लोगों के राशन को गायब कर रहे हैं। राशन वितरण में भारी घोटाला हो रहा है। वहीं, इस पूरे मामले पर फूड इंस्पेक्टर ललित कुमार ने कहा कि उनकी तरफ से राशन दिया गया है। हो सकता है, परिवार का कोई अन्य सदस्य राशन ले गया हो।
गौरतलब है कि प्रशासन के खाद्य व आपूर्ति विभाग ने इस बार राशन वितरण के लिए निजी एजेंसी को काम सौंपा है। वह किसी भी लाभार्थी को कोई रिसीविंग नहीं दे रहे हैं कि उन्होंने राशन लिया है या नहीं। इसकी वजह से ही कई समस्याएं हो रही हैं।
पूर्व पार्षद ने की विजिलेंस जांच की मांग
राशन वितरण में हो रही गड़बड़ी को लेकर पूर्व पार्षद सतीश कैंथ ने चीफ विजिलेंस अफसर को एक पत्र लिखा है और इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने तीन केसों का हवाला दिया है और कहा कि शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने राशन लिया ही नहीं, लेकिन उनके कार्ड पर किसी और ने राशन उठा लिया है। इसमें भ्रष्टाचार हो रहा है।
कैंथ ने पत्र की एक कॉपी पीएमओ को भी भेजी है, ताकि जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई हो सके। उधर, लोकल बॉयज आर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट भरत अग्रवाल ने कहा है कि पीएमजीकेएवाई का आवंटन सही तरीके से नहीं हो रहा है, जिसके चलते लाभार्थियों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने मांग की है कि राशन कब और कहां बंटेगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
केस-एक: मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में रहने वाले अजय ने बताया कि वह रविवार को सुबह साढ़े 9 बजे मलोया के कम्युनिटी सेंटर राशन लेने के लिए गए। वहां पर काफी भीड़ होने की वजह से वहां काम कर रहे एक कर्मचारी ने आधार कार्ड रख लिया और कहा कि 12 बजे के बाद आना। अजय जब 12 बजे के बाद गए तो उन्हें कहा गया कि उनका आधार कार्ड सिस्टम में दिखाई नहीं दे रहा है। अजय को अगले दिन आने को कहा गया।
अगले दिन पर्ची सिस्टम कर दिया तो उसके अनुसार अजय का नंबर मंगलवार को आया। मंगलवार को जब वह कम्युनिटी सेंटर गए तो उन्हें कहा गया कि उनके कार्ड पर रविवार को ही सुबह 11 बजे राशन लिया जा चुका है। अजय ने आरोप लगाया कि सुबह 9.30 बजे से करीब 12 बजे तक आधार कार्ड वहीं के कर्मचारी के पास था, इसलिए राशन वहीं के किसी कर्मचारी ने लिया है। अजय को 125 किलो गेहूं और पांच किलो दाल मिलनी थी।
केस-दो: मलोया स्मॉल फ्लैट्स के मकान नंबर 416 में रहने वाली कमलावती मंगलवार को मलोया के कम्युनिटी सेंटर में पीएमजीकेएवाई के तहत मिलने वाला राशन लेने के लिए पहुंची। यहां काफी देर लाइन में लगे रहने के बाद जब उनका नंबर आया तो खाद्य व आपूर्ति विभाग के अधिकारी की तरफ से कह दिया गया कि उनके आधार कार्ड पर राशन जा चुका है। यह सुनने के बाद कमलावती सन्न रह गईं।
उन्होंने अमर उजाला को बताया कि उनके परिवार में पांच लोग हैं। बेटा हिमाचल प्रदेश में है और बेटियां अपने ससुराल में हैं। पति काम करते हैं। परिवार में से सिर्फ वही है, जो राशन लेने के लिए यहां पहुंची तो राशन कौन ले गया। कलावती ने अधिकारियों ने सामने कई बार गुहार लगाई, लेकिन पुलिसकर्मियों की ओर से उन्हें वहां से भगा दिया गया। कमलावती को 125 किलो गेहूं और पांच किलो दाल मिलनी थी।
केस-तीन: रामरबार फेस-2 में किराये पर रहने वाली ललिता ने बताया कि उनके परिवार में 6 लोग हैं। बच्चे छोटे हैं और पति शिव कुमार एक फैक्टरी में काम करते हैं। रामदरबार में 23 सितंबर को राशन बांटा जा रहा था। पहले दो दिन काफी भीड़ रही। वह पूरे दिन लाइन में लगी रही, जब नंबर आया तो खाद्य व आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि उनका राशन 10 सितंबर को ही लिया जा चुका है।
ललिता ने अधिकारियों को काफी समझाने का प्रयास किया कि उनके परिवार में और कोई नहीं है, जो राशन ले कर जाएगा। इसके बावजूद उनकी एक न सुनी गई और वहां से भगा दिया गया। इसके बाद ललिता सेक्टर-17 स्थित दफ्तर भी गईं लेकिन उन्हें अब तक राशन नहीं मिला है। ललिता को 150 किलो गेहूं और पांच किलो दाल मिलनी थी।