पंजाब विश्वविद्यालय के 65 से अधिक शिक्षकों का प्रमोशन लंबित हैं लेकिन 15 शिक्षकों को ही यह लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसके साक्षात्कार के लिए 21 व 22 नवंबर की तिथि तय की गई है। पुटा ने कहा है कि उनकी मांग के बाद पीयू प्रशासन की ओर से कदम तो उठाया गया है, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं है। 15 शिक्षकों को ही लाभ न दें, उनके अलावा वंचित शिक्षकों को भी लाभ के दायरे में लाएं।
पुटा ने वीसी को भेजे पत्र में कहा है कि उन्होंने 3 नवंबर को इस मांग के लिए धरना देने की चेतावनी दी थी। उस धरने को रोकने के लिए महज 15 शिक्षकों का ही साक्षात्कार तय किया गया है जबकि सभी को लाभ दिया जाना चाहिए था। सभी शिक्षक एक समान हैं। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। इसलिए दो दिन में 15 शिक्षकों के साक्षात्कार हो सकते हैं तो एक सप्ताह में बाकी के शिक्षकों के भी साक्षात्कार करवाकर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इस पर जल्द से जल्द अमल करें।
खालिद-सिद्धू ग्रुप बोला- 28 को देना चाहिए था धरना, लेकिन इसे बढ़ाकर 3 नवंबर किया
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने पुटा के इस पत्र पर कहा है कि पहले कार्यकारी सदस्यों ने बैठक करके यह तय किया कि प्रमोशन को लेकर 28 अक्तूबर को धरना दिया जाएगा लेकिन बाद में अध्यक्ष व सचिव ने बिना कार्यकारी की बैठक के धरने की तिथि बढ़ाकर 3 नवंबर कर दी जो पुटा संविधान के खिलाफ है। 28 को ही शिक्षकों के लिए धरना दिया जाना चाहिए था। कहा कि पदोन्नति के प्रकरण के बारे में संबंधित शिक्षकों को पता ही नहीं लेकिन उन्हें पहले पता लग गया जबकि यह गोपनीय होता है।
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने पुटा को पत्र भी भेजा है। कहा है कि उन्होंने पहले कई बार यह मांग उठाई है कि वरिष्ठता के आधार पर वार्डन लगाए जाने चाहिए। वर्ष 2020 में भी वार्डन लगाए गए हैं। क्या इसके लिए अर्जियां मांगी गई थी। यदि नहीं मांगी गई तो पुटा ने क्या कदम उठाया। इस पर अपना रुख साफ करें। कहा कि नियम सभी के लिए बराबर हैं। पुटा सभी शिक्षकों को समान रूप से देखे।