पंजाब सरकार ने नई भर्तियों के लिए केंद्रीय वेतनमान लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य मंत्रिमंडल की ओर से लिए फैसले के आधार पर वित्त विभाग द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों और विभाग प्रमुखों को दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार के सभी प्रशासनिक विभागों में सभी काडर में भर्ती/नियुक्तियों का वेतनमान केंद्र द्वारा अधिसूचित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत ज्यादा नहीं होना चाहिए। माना जा रहा है कि राज्य सरकार वेतनमान संबंधी फैसले को कैबिनेट की आगामी बैठक में हरी झंडी दे सकती है।
उल्लेखनीय है कि वेतनमान संबंधी उक्त फैसले को लागू करने के लिए वित्त विभाग द्वारा अफसरों की कमेटी का गठन किया गया था, जिसे पंजाब सरकार के विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों के वेतनमान और उन्हीं वर्गों के लिए केंद्र के सातवें आयोग के वेतनमान की समानता तलाशने का काम सौंपा गया।
इस कमेटी ने 1 जनवरी, 2006 से राज्य सरकार द्वारा 5वें पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार अपने मुलाजिमों के दिए वेतनमान का गहन अध्ययन किया। इसके साथ ही कमेटी ने 2006 और 2016 में केंद्र सरकार द्वारा छठे और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार जो वेतनमान लागू किए हैं, उनका भी अध्ययन किया।
यह है पंजाब का मौजूदा वेतन ढांचा
पंजाब के मौजूदा वेतन ढांचे में पांच पे-बैंड और 32 ग्रेड-पे शामिल हैं, जबकि छठे केंद्रीय वेतन आयोग ने 15 ग्रेड-पे तय किए थे। दूसरी ओर, राज्य सरकार के फैसले को लेकर मुलाजिम संगठन लामबंद होने लगे हैं। कर्मचारियों का मानना है कि इस फैसले से उन्हें जहां सूबे के पे-बैंड और ग्रेड-पे के आधार पर लाभ होने थे, वे केंद्रीय ग्रेड-पे के तहत मिलेंगे ही नहीं बल्कि घट भी जाएंगे।
कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार द्वारा गठित छठे वेतन आयोग पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने छठे वेतन आयोग के नाम पर कर्मचारियों को बीते कई सालों के धोखे में रखा। इसी वेतन आयोग की आड़ में कर्मचारियों को न तो उनके डीए की बकाया किस्तें दी गईं, न एरियर चुकाया गया और अब केंद्र का सातवां वेतन आयोग थमाकर सरकार कर्मचारियों का पिछला सारा बकाया पैसा हड़पना चाह रही हैं।