पत्रकार पंकज उर्फ सन्नी खन्ना आत्महत्या मामले में कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सीपीएस गुर्जर समेत तीन लोग अब जेल में रहेंगे। अंबाला एडिशनल सेशन कोर्ट ने वीरवार को पूर्व मुख्य संसदीय सचिव व नारायणगढ़ के पूर्व विधायक रामकिशन गुर्जर, अजीत और विजय अग्रवाल को चार-चार साल की सजा सुनाई। वहीं 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही तीनों आरोपी पीड़ित की मां को 5-5 लाख रुपये मुआवजा भी देंगे।
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तीनों को अदालत ने मंगलवार को दोषी करार दिया था। अदालत ने सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने और गवाहों की सुनवाई के बाद तीनों को युवक पंजक खन्ना आत्महत्या कांड में दोषी पाया। दोषी करार देते ही पुलिस ने सीपीएस समेत तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
इस केस की सुनवाई के दौरान ही पंकज के पिता की मौत हो चुकी है और अब पंकज की मां अकेली है और उसकी बहन का भी विवाह हो चुका है। फैसले के बाद पंकज की बहन प्रीति खन्ना ने कहा कि आठ साल बाद कोर्ट से न्याय मिला है।
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ये था मामला
पंकज खन्ना सुसाइड केस में आया फैसला
जून 2009 में पंकज खन्ना पुत्र यशपाल खन्ना ने संदिग्ध परिस्थितियों में सल्फास निगल ली थी। उसे सिविल अस्पताल में ले जाया गया, गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई रेफर किया गया। वहां उसने दम तोड़ दिया था।
पंकज ने सुसाइड नोट में मुख्य ससंदीय सचिव रामकिशन गुज्जर और उनके समर्थकों विजय अग्रवाल उर्फ मैक्की व अजीत अग्रवाल को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार बताया था। पीड़ित पक्ष के वकील अनिल कौशिक ने बताया कि सुसाइड नोट में पंकज ने लिखा था कि वह पहले गुज्जर का समर्थक था।
उसके मामा ने जब बसपा ज्वाइन की तो वह भी साथ ही चला गया। इस बात से गुज्जर और उसके समर्थक नाराज थे। गुज्जर के कहने पर अन्य आरोपियों ने उसे पीटा और उसे झूठे मामले में फंसाया। जब वह पुलिस स्टेशन शिकायत करने गया तो उसकी सुनवाई ही नहीं हुई। आरोपियों ने थाने में आकर उसे बुरी तरह पीटा।
अहम गवाह भी मुकरे, लेकिन हुई न्याय की हुई जीत
पंकज खन्ना सुसाइड केस में आया फैसला
एडवोकेट अनिल कौशिक कहते हैं करीबन आठ साल इस केस में कई उतार चढ़ाव रहे, लेकिन अंतत: न्याय की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक अहम गवाह भी मुकर गया था, लेकिन अदालत के आदेश पर उसे फिर से अदालत में तलब कर उससे क्रास एग्जामिनेशन किया गया।
एडवोकेट अनिल कौशिक ने कहा कि ये गवाह एक एएसआई था और उसने पहले अदालत को बताया था पंकज ने मरने से पहले आरोपियों को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार बताया था। एडवोकेट कौशिक ने कहा कि जब तक एएसआई पुलिस ड्यूटी में रहा, तब तक तो वह अपने बयानों पर अडिग रहा,
लेकिन अब पुलिस महकमे से रिटायर्ड होने के बाद क्रास एग्जामिनेशन में वह गवाही से मुकर गया और अब उसका कहना है कि पंकज के परिजनों ने ये बयान उससे दबाव देकर दिलवाए थे। उनके अनुसार उसके बावजूद भी अदालत में सच की जीत हुईं है।
इस मामले में सीपीएस गुज्जर सुप्रीम कोर्ट तक गए। वहां एक बार तो उन्हे राहत मिल गई थी। लेकिन पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट ने रिविजन पेटिशन फाइल की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए कि सीपीएस गुज्जर निचली अदालत में कोर्ट ट्रायल को ज्वाइन करें।
इससे पहले हाईकोर्ट ने भी गुज्जर की अदालत की अंतरिम जमानत स्वीकार कर ली थी। लेकिन निचली कोर्ट का ट्रायल ज्वाइन करने का आदेश दिया था। एडवोकेट ने बताया कि इससे पूर्व अंबाला पुलिस ने भी दबाव में आकर एक बार तो जांच में सीपीएस गुज्जर को इस मामले में क्लीन चिट तक दे दी थी।
लेकिन पीड़ित पक्ष ने अदालत में गुहार लगाई और अदालत ने पीड़ित पक्ष की याचिका पर गौर करते हुए धारा 319 के तहत गुज्जर को आरोपी बनाते हुए सम्मन जारी किया था। जिसके बाद कोर्ट में ट्रायल चला और अब सीपीएस समेत तीनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया गया है।