दूसरी ओर, कर्फ्यू के कारण सब्जियों की मांग घट गई है। हाल यह है कि आढ़तियों को पत्तागोभी, शिमला मिर्च व ब्रोकली के खरीदार ही नहीं मिल रहे, जिस कारण इन्हें फेंकना पड़ रहा है। कर्फ्यू के कारण होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद हैं। सिर्फ होम डिलीवरी हो रही है। इससे सब्जियों की मांग लगभग न के बराबर है। ऐसे में आढ़तियों को घाटे में जाकर इन सब्जियों को बेचना पड़ रहा है।
आढ़तियों ने बताया कि रविवार को पत्तागोभी थोक में 3 रुपये किलो बिकी। पिछले साल इस समय पत्तागोभी 15 रुपये किलो बिक रही थी। वहीं थोक में 5 से 7 रुपये किलो बिक रही शिमला मिर्च के भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। शाम के समय बोरों में बंद शिमला मिर्च खराब हो जाती है। इस कारण इसे फेंकना पड़ता है। यही हाल ब्रोकली का है। ब्रोकली थोक में 20 रुपये किलो बिक रही है, लेकिन सामान्य तौर पर घर में यह बनती नहीं है। होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद होने से इसकी बिक्री भी ठप है। पिछले साल इस समय ब्रोकली 250 रुपये किलो बेची जा रही थी।