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महंगाई: थोक में टमाटर चार रुपये किलो, चंडीगढ़ की मंडी कमेटी ने तय कर दिया 25 रुपये दाम

Wed, 26 May 2021 10:30 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आढ़तियों का कहना है कि कमेटी के कर्मचारी बंद कमरे में बैठकर फल व सब्जी के दाम तय करते हैं। इससे लोगों तक सब्जियां चार से पांच गुना रेट पर पहुंच रही हैं। बताया गया है कि कमेटी के कर्मचारी कभी भी मंडी में नहीं दिखते।  
 
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सब्जियां (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक कमरे में बैठकर सब्जी व फलों के दाम तय करने वाली मंडी कमेटी के अधिकारी भी सब्जियों के भाव बढ़ाने में काफी हद तक जिम्मेदार हैं। जो टमाटर रविवार को थोक में 4 रुपये किलो बिका, मंडी कमेटी ने उसके दाम फुटकर में 25 रुपये तय कर दिए। रेहड़ी-फड़ी तक पहुंचकर यह टमाटर 35 रुपये किलो तक बिकने लगा।  

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इसी तरह जो हरी मिर्च थोक में 10 रुपये किलो के भाव से बिकी, उसका फुटकर दाम 30 रुपये तय कर दिया और यह लोगों तक 35 से 40 रुपये किलो तक पहुंची। वहीं, थोक में 30 रुपये किलो वाले नींबू का रेट भी मंडी कमेटी ने 70 रुपये किलो तय किया। 35 रुपये किलो के थोक भाव में बिकने वाले अदरक के दाम भी कमेटी ने फुटकर में 60 रुपये तय कर दिए। आढ़तियों का कहना है कि कमेटी के कर्मचारी बंद कमरे में बैठकर दाम तय करते हैं। बताया गया है कि कमेटी के कर्मचारी कभी भी मंडी में नहीं दिखते।  

पत्तागोभी और शिमला मिर्च के खरीदार हीं नहीं, फेंकनी पड़ रही 

दूसरी ओर, कर्फ्यू के कारण सब्जियों की मांग घट गई है। हाल यह है कि आढ़तियों को पत्तागोभी, शिमला मिर्च व ब्रोकली के खरीदार ही नहीं मिल रहे, जिस कारण इन्हें फेंकना पड़ रहा है। कर्फ्यू के कारण होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद हैं। सिर्फ होम डिलीवरी हो रही है। इससे सब्जियों की मांग लगभग न के बराबर है। ऐसे में आढ़तियों को घाटे में जाकर इन सब्जियों को बेचना पड़ रहा है। 

आढ़तियों ने बताया कि रविवार को पत्तागोभी थोक में 3 रुपये किलो बिकी। पिछले साल इस समय पत्तागोभी 15 रुपये किलो बिक रही थी। वहीं थोक में 5 से 7 रुपये किलो बिक रही शिमला मिर्च के भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। शाम के समय बोरों में बंद शिमला मिर्च खराब हो जाती है। इस कारण इसे फेंकना पड़ता है। यही हाल ब्रोकली का है। ब्रोकली थोक में 20 रुपये किलो बिक रही है, लेकिन सामान्य तौर पर घर में यह बनती नहीं है। होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद होने से इसकी बिक्री भी ठप है। पिछले साल इस समय ब्रोकली 250 रुपये किलो बेची जा रही थी। 
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यह हैं थोक व मंडी कमेटी की ओर से तय किए गए फुटकर दाम

प्याज : थोक : 12 से 13 रुपये किलो लोकल, 16 से 17 रुपये किलो नासिक वाला
फुटकर : 20 रुपये किलो लोकल, 27 रुपये नासिक वाला

आलू : थोक : 7 से 8 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 10 से 15 रुपये प्रति किलो

हरी मिर्च : थोक : 10 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 30 रुपये प्रति किलो

मटर : थोक : 25 से 50 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 70 रुपये प्रति किलो

भिंडी : थोक : 7 से 12 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 30 रुपये प्रति किलो

तोरई : थोक : 15 से 18 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 30 से 35 रुपये प्रति किलो

तरबूज/खरबूज : थोक : 5 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 20 रुपये प्रति किलो

टमाटर : थोक : 4 रुपये रुपये प्रति किलो 
फुटकर: 25 रुपये रुपये प्रति किलो

फूल गोभी: थोक : 10 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 30 रुपये प्रति किलो

अदरक: थोक : 35 रुपये प्रति किलो
फुटकर : 60 रुपये प्रति किलो

मनमाने रेट वसूल रहे रेहड़ी-फड़ी वाले  
मंडी कमेटी बेशक प्रतिदिन सब्जी व फलों की सूची जारी करती हो, लेकिन रेहड़ी-फड़ी वाले मनमाने तरीके से ही अपनी सब्जी बेचते हैं। रविवार को नारियल थोक में 40 रुपये में बिका था। कमेटी ने रिटेल में नारियल के दाम 55 रुपये तय किए थे। इसके बावजूद कुछ लोगों ने 70 रुपये में नारियल बेचा। इसी तरह रेहड़ी-फड़ी वाले सब्जियों के दाम लोगों से ज्यादा वसूल रहे हैं। इसकी लगातार निगम व कमेटी के पास शिकायत भी होती रहीं हैं।
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