पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह नई पार्टी के साथ ही अगले विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। हालांकि बुधवार को भी उन्होंने पार्टी के नाम का एलान नहीं किया। कैप्टन ने कहा कि चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद चुनाव चिन्ह के साथ नाम की घोषणा की जाएगी। मेरे वकील इस पर काम कर रहे हैं। जहां तक सिद्धू की बात है, वह जहां से भी लड़ेंगे, हम उनसे लड़ेंगे। समय आने पर हम सभी 117 सीटों पर लड़ेंगे।
कल कृषि कानूनों पर दिल्ली में अमित शाह से मिलेंगे कैप्टन
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सीएम ने कहा कि उन्होंने जो वादे किए वे पूरे किए। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के फैसले को सही ठहराते हुए कैप्टन ने कहा कि पंजाब की सुरक्षा उनके लिए सबसे अहम है। पंजाब ने आतंकवाद देखा है। किसान आंदोलन को लेकर भी कैप्टन ने अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह गुरुवार को कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। मुलाकात के दौरान कैप्टन के साथ किसान, कृषि विशेषज्ञ और आढ़ती भी मौजूद रहेंगे। सभी मिलकर चर्चा करेंगे और कृषि कानूनों का हल निकालने का प्रयास करेंगे।
कांग्रेस के कई लोग मेरे संपर्क में, नहीं लूंगा किसी का नाम
वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी के कई लोग उनके संपर्क में हैं। समय आने पर खुलकर सामने आएंगे। हम उपयुक्त क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन मैं उनका नाम नहीं लूंगा। पहले से ही मेरे समर्थकों को परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देने के सवाल पर कैप्टन ने कहा कि मैंने कांग्रेस में 50 साल बिताए हैं, मैं और 10 दिनों तक क्या नहीं रह सकता।
उन्होंने अधिकतर विधायकों के उनके पद पर बने रहने का विरोध करने के कांग्रेस के दावों को खारिज कर दिया, और कहा कि एक बार जब उन्होंने (पार्टी नेतृत्व) मुझे बदलने का मन बना लिया, तो ये सभी बहाने बनाए गए। यह बताते हुए कि उनकी सरकार के लिए कांग्रेस का तथाकथित 18-सूत्रीय एजेंडा पंजाब 2017 के घोषणापत्र का हिस्सा था, उन्होंने कहा कि खड़गे समिति को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि सभी चुनावी वादों में से 92 फीसदी पूरे किए गए थे।
कैप्टन ने अपने विरोधियों विशेषकर नवजोत सिद्धू और सुखजिन्दर रंधावा को आड़े हाथ लेते हुए छोटी-छोटी बातों में लिप्त होने के लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब से सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस की बागडोर संभाली थी, उनके सर्वेक्षणों के अनुसार, पार्टी की लोकप्रियता में 25 फीसदी की गिरावट आई थी।
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अपनी पाकिस्तानी दोस्त अरूसा आलम पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए पूर्व सीएम ने उनके द्वारा पैसे भेजे जाने के आरोपों को निराधार बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या पंजाब में अरूसा ही एकमात्र मुद्दा बचा है, तो उन्होंने रंधावा की मंशा पर सवाल उठाया कि इतने सालों बाद अब इस मुद्दे को उठाने की क्या मंशा है। अरूसा 16 साल से उनसे मिलने आ रहीं हैं, वह निश्चित रूप से उन्हें फिर से आमंत्रित करेंगे।
भाजपा के साथ करेंगे सीट शेयर
कैप्टन ने कहा कि उन्होंने कभी भाजपा के साथ गठबंधन करने की बात नहीं की। उन्होंने कहा कि वह जो करना चाहते थे, वह सीट बंटवारा है। हालांकि, उन्होंने अभी तक इस पर भाजपा से बात नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन करने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि वे केवल टूटे हुए अकाली समूहों को साथ लाएंगे।
मेरे फैसलों को लागू कर रहे चन्नी
कैप्टन सिंह ने अपने साढ़े चार साल के शासन के दौरान वादे पूरा नहीं किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हमने जो करने का फैसला किया है, चरणजीत चन्नी सरकार उसे लागू कर रही है। हम जो भी काम शुरू करते हैं, उसे बस आगे बढ़ाया जा रहा है। लाल डोरा और मलिन बस्तियों की जमीन का मालिकाना हक मेरे द्वारा शुरू किया गया था, यह मेरे मंत्रिमंडल का निर्णय था।
बरगाड़ी और बेअदबी में 19 अधिकारियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
बरगाडी और बेअदबी मामलों पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जांच में हैं। उन्होंने कहा कि 19 पुलिस अधिकारियों और 21 नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रक्रियाओं में समय लगता है।