दूसरी ओर, मंत्री पद के चाहवान विधायकों ने चंडीगढ़ से दिल्ली तक भागदौड़ शुरु कर दी है। कुछ विधायक जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह से बार-बार मिल रहे हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो पार्टी आलाकमान के जरिए प्रदेश कांग्रेस और मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। नवजोत सिंह सिद्धू के मंत्री पद छोड़ने के बाद कैबिनेट में तीन पद खाली हैं, जिन्हें लेकर मालवा और माझा के कई विधायक सक्रिय हैं।
पंजाब वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के कैबिनेट रैंक वाले चेयरमैन पद पर विराजमान राजकुमार वेरका मंत्रिमंडल में आने की बार-बार इच्छा जताते रहे हैं। वहीं पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह के बारे में भी कहा जा रहा है कि वे भी कैबिनेट मंत्री का ओहदा हासिल करना चाहते हैं जबकि एक मौजूदा मंत्री ने अपनी सेहत का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उन्हें स्पीकर का ओहदा दे दिया जाए।
इनके अलावा, शाम चौरासी, जंडियाला गुरु और गिल हलके के कांग्रेस विधायक मंत्री पद के चाहवान नेताओं की कतार में हैं। वहीं, जिन छह विधायकों को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सलाहकार लगाया गया है, उनमें से भी तीन विधायक मंत्री पद के इच्छुक हैं और वे सलाहकार की जगह कैबिनेट मंत्री बनना चाहते हैं।