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रायन स्कूल मामले से सबक, 15 हजार निजी स्कूलों पर नकेल कसेगी सरकार

Thu, 12 Oct 2017 10:09 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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गुरुग्राम - फोटो : self
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गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल मामले से सबक लेने के बाद हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी 15 हजार निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। सूबे के इन स्कूलों को कानूनी दायरे में लाकर कानून बनाया जाएगा।
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विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह कानून पारित होने की संभावना है। आगामी शिक्षा सत्र में प्रदेश सरकार इस संशोधित एक्ट के तहत स्कूलों पर नकेल कसेगी। कर्नाटका में शिक्षा विभाग ने ऐसा ही कानून बनाकर निजी स्कूलों पर नियंत्रण रखा है। उधर, शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. केके खंडेलवाल ने कहा है कि रायन इंटरनेशनल स्कूल में आरोपियों की नियमित जमानत होने तक प्रशासक की तैनाती बनी रहेगी।

हरियाणा में वर्तमान समय में आलम यह है कि प्रदेश के निजी स्कूलों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नियमों के मुताबिक इन स्कूलों का हर साल निरीक्षण होना चाहिए, लेकिन स्कूल संचालक जिला शिक्षा अधिकारी को घुसने नहीं देते। यदि ये स्कूल अपनी मनमानी करते हैं या नियमों की अवहेलना करते हैं तो सरकार के पास इन पर पेनल्टी लगाने का भी अधिकार नहीं है। अब संशोधित कानून के तहत सरकार के पास पेनल्टी लगाने का अधिकार होगा। 
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क्या कहता है 1995 का एक्ट

- फोटो : File Photo
क्या कहता है 1995 का एक्ट
1995 का हरियाणा एजुकेशन एक्ट कहता है कि हर साल स्कूल का निरीक्षण होना चाहिए, लेकिन यह निरीक्षण सिर्फ मान्यता देने के समय होता है। सरकार यदि कड़ा रुख अपनाकर मान्यता रद्द करने जैसा कदम उठाती है तो स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर संकट आ खड़ा होता है।

मनमानी फीस पर भी लगेगा अंकुश
हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों की ओर से ली जा रही मनमानी फीस पर भी एक्ट के माध्यम से अंकुश लगाने की तैयारी है। एक्ट के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। यह जुर्माना प्रतिदिन के हिसाब से तय किया जाएगा।

स्कूलों का आनलाइन निरीक्षण होगा
कानून में यह प्रावधान बनाया जाएगा कि इन निजी स्कूलाें का आनलाइन निरीक्षण किया जाए। यह निरीक्षण स्वयं स्कूलों को करवाना होगा। निरीक्षण के लिए संबंधित प्रोफेशनल पैनल पर लिए जाएंगे। निरीक्षण की कमेटी में स्कूल प्रिंसिपल, फेकल्टी, प्रबंधन और पेरेंटस ऐसोसिएशन भी मौजूद रहेगी।

अभी जो कानून है, वह बहुत कमजोर है। बड़ी लापरवाही तब होती है, जब हम छोटी-छोटी लापरवाहियों को नजरअंदाज करें। इन स्कूलों की जवाबदेही तय करने के लिए नए प्रावधान करने जरूरी हैं।
-डॉ. केके खंडेलवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग
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