पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्धू के प्रदेश प्रधान बनने के बाद प्रशांत किशोर ने पंजाब कांग्रेस के बजाय सोनिया गांधी के दरबार में पैठ बनाने में सफलता हासिल कर ली है। वह इन दिनों कांग्रेस आलाकमान को सलाह देने का काम करने लगे हैं, हालांकि सलाहकार के रूप में उनके नाम का एलान नहीं हुआ है। ऐसे में प्रशांत के लिए अब कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए सलाहकार के तौर पर काम करना संभव नहीं रह गया। प्रशांत किशोर 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को मजबूत करने के लिए पार्टी के साथ काम कर सकते हैं।
एक रुपये वेतन पर कैबिनेट रैंक के साथ हुई थी नियुक्त
कैप्टन ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रशांत की सेवाएं लेने के लिए उन्हें एक रुपये के वेतन पर कैबिनेट रैंक के साथ प्रधान सलाहकार नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के बाद कुछ ही दिन सक्रिय रहे प्रशांत उस समय से कैप्टन सरकार से दूरी बनाए हुए थे, जब उन्होंने विधायकों को चंडीगढ़ बुलाकर पूछताछ की थी और मौजूदा विधायकों में से कौन-कौन दोबारा टिकट दिए जाने लायक हैं, के बारे में कैप्टन को रिपोर्ट सौंपी थी।
प्रशांत के इस कदम के बाद कांग्रेस विधायकों में भारी नाराजगी फैल गई थी, जिसे देखते हुए खुद कैप्टन को आगे आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। इसके बाद प्रशांत किशोर ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से दूरी बना ली और केवल मुख्यमंत्री तक ही खुद को सीमित कर लिया था। प्रशांत को कैबिनेट रैंक के तहत वह सभी सुविधाएं मुहैया कराई गई थी, जो इस रैंक के मंत्रियों आदि को मिलती हैं। उन्हें पंजाब सिविल सचिवालय में एक कमरा और स्टाफ भी अलॉट किया गया था, लेकिन वह एक दिन भी अपने कार्यालय में नहीं बैठे।