मीटर इंस्पेकशन और टेस्टिंग चार्ज में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले सिंगल फेज के 50 रुपये और थ्री फेज के 100 रुपये, एलटीसी मीटर के 500 रुपये व एचटी-ईएचटी मीटर के एक हजार रुपये प्रति मीटर होते थे, अब सिंगल फेज के 100 रुपये, थ्री फेज के 200 रुपये, एलटीसी मीटर के 750 रुपये और एचटी-ईएचटी मीटर के 1500 रुपये चुकाने होंगे।
अपने खर्च पर करानी होगी लाइन-ट्रांसफार्मर की जांच
बिजली निगम ने एक और नया प्रावधान कर दिया है। अब अगर किसी लाइन, ट्रांसफार्मर या उपकरण की टेस्टिंग भी करवानी है तो उसका चार्ज उपभोक्ता को देना होगा। अब तक इस प्रकार की सेवाओं के लिए किसी प्रकार की राशि वसूल नहीं की जाती थी।
यदि कोई एई और एईई की सेवाएं लेता है उसे 6800 रुपये प्रतिदिन, जेई की सेवा लेते हैं 4400 रुपये और हेल्पर की सेवा लेते हैं तो 1800 रुपये देने होंगे। इसी प्रकार टेस्टिंग के लिए निगम का कोई उपकरण लेते हैं तो उसके लिए अलग से चार्ज देना होगा।
निगम के फैसले पर उठ रहे सवाल
निगम के अधीक्षण अभियंता कामर्शियल की ओर से अनेक चार्ज में बढ़ोतरी का सरकुलर 11 जुलाई को जारी किया गया है। इस अनुसार मीटर सर्विस, इंस्टालेशन चार्ज, एप्लीकेशन प्रोसेसिंग फीस इत्यादि चार्ज में 2011 में बढ़ोतरी की गई थी। निगम के फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं, कि अगर बिजली निगम फायदे में जा रहे हैं तो फिर उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ क्यों डाला जा रहा है।
सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा का कहना है कि फायदे में दिखाए जा रहे निगम एक तरफ तो बिजली की दरें न बढ़ाकर वाहवाही लूट रहे हैं और दूसरी ओर अनेक तरह के चार्ज में बढ़ोतरी कर उपभोक्ताओं की कमर तोड़ी जा रही है।