पंचकूला से वन्य जीव विशेषज्ञ शिव कुमार ने भी बडौंदा गांव के खेतों में बने पंजों के निशानों का गंभीरता से अध्ययन किया। वन्यजीव विभाग के निरीक्षक तेजबीर का कहना है कि हम जांच कर रहे हैं और खेतों से पंजे के निशान ले लिए गए है। उन्होंने कहा कि तेंदुए के पंजो के निशान अलग तरह के होते है और गांव बडौंदा में पाए गए पंजो के निशान तेंदुए से पूरी तरह अलग है।
निरीक्षक तेजबीर ने कहा कि देर शाम को पिंजरा लगा दिया जाएगा है और वन्य विभाग की रेस्क्यू टीम रात को मौके पर रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह तेंदुआ हुआ तो रखे गए गोश्त की गंध से पिंजरे में पकड़ा जाएगा।
तेंदुआ पकड़ने के लिए पांच टीमें तैनात
बडौंदा गांव में तेंदुआ पकड़ने के लिए पांच टीमें अलर्ट पर रखी गई हैं। वन्य जीव निरीक्षक तेजबीर ने बताया कि कैथल, यमुनानगर, करनाल, अंबाला व कुरुक्षेत्र की टीमें अलर्ट पर हैं। तेंदुआ दिखाई देने पर कोई भी टीम बुलाकर पकड़ने का प्रयास किया जाएगा।
तेंदुआ दिन के समय किसी पर हमला नहीं करता और केवल रात में ही शिकार करता है। तेंदुआ आमतौर पर कुत्ते, भेड़, बकरी, खरगोश, बछड़ा का शिकार करता है और किसी विषम परिस्थिति में ही मनुष्य पर आक्रमण करता है।