पंजाब की आबोहवा पराली जलाने से बेहद प्रदूषित हो गई है। लोगों का सांस लेना भी दूभर हो रहा है। गुरुवार को पंजाब का एक्यूआई 271 यानी खराब श्रेणी में रहा। वहीं लुधियाना व मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया। लुधियाना का एक्यूआई 319, मंडी गोबिंदगढ़ का 391, अमृतसर का 226, पटियाला का 276, जालंधर का 216, खन्ना का 196 रिकॉर्ड किया गया।
पंजाब सरकार के दावों के विपरीत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पराली जलाने के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। गुरुवार को पंजाब में पराली जलाने के 2666 मामले सामने आए। गुरुवार को लगातार सातवें दिन संगरूर जिले में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं।
पंजाब में गुरुवार को पराली जलाने के 2666 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक 452 मामले अकेले संगरूर जिले के हैं। एसएएस नगर में सबसे कम पराली जलाने का एक मामला सामने आया है। बठिंडा में 336, फिरोजपुर में 269, बरनाला में 254 मामले सामने आए हैं।
पंजाब में अब तक इस साल पराली जलाने के 24146 मामलों को दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा 2021 के मुकाबले 40 फीसदी अधिक है। 2021 में प्रदेश में पराली जलाने के 20433 मामलों को दर्ज किया गया था।
3600 केसों में अब तक 83.10 लाख रुपये का जुर्माना
पंजाब में पराली जलाने के बढ़ते मामलों को देख पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) भी सख्त हो गया है। बोर्ड ने 3600 केसों में अब तक 83 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से करीब 38 हजार रुपये की राशि किसानों से वसूल भी कर ली गई है। बाकी जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया अभी जारी है।