जाखड़ ने लगातार दो ट्वीट करते हुए लिखा कि हमें अपने सुरक्षा बलों पर गर्व है, जो हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने और विदेशी आक्रमणकारियों से भारत की रक्षा करने के लिए हैं। विफलताओं को छिपाने और नेताओं व सरकारों द्वारा फैलाई गई गंदगी को साफ करने के लिए इनका उपयोग करना बहुत खतरनाक होगा। यह न केवल हमारे बहादुर बलों को बदनाम करेगा, बल्कि उनके मनोबल, अनुशासन और तैयारियों को भी बुरी तरह प्रभावित करेगा। राजनीतिक हथियार के रूप में अपनी इन ताकतों के ऐसे प्रयोग से बचना चाहिए। इस बात को कैप्टन अमरिंदर सिंह से बेहतर कोई नहीं जानता।
बुधवार को जाखड़ ने ट्वीट कर इस मामले में पहला सवाल मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर दागा था। मुख्यमंत्री चन्नी पांच अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने नई दिल्ली गए और मुलाकात के दौरान पंजाब में भारत-पाक सीमा को ‘सील’ करने का आग्रह किया था। इसके एक हफ्ते बाद बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किमी क्षेत्र में गिरफ्तारी, जब्ती, तलाशी के लिए बढ़ा दिया। तब जाखड़ ने अपने ट्वीटर हैंडल पर मुख्यमंत्री चन्नी को संबोधित करते हुए लिखा- आपने क्या पूछा है, सावधान रहें! क्या चरणजीत चन्नी ने अनजाने में पंजाब का आधा हिस्सा केंद्र सरकार को सौंप दिया है? 25000 वर्ग किमी (कुल 50000 वर्ग किमी में से) को अब बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। पंजाब पुलिस स्तब्ध है। क्या हम अब भी राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता चाहते हैं?
परगट सिंह ने गुरुवार को पंजाब भवन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कैप्टन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब पहली बार दिल्ली गए तो धान की खरीद में 10 दिन की देरी करा आए और अब दूसरे दौरे के दौरान बीएसएफ के बारे में फैसला करवा आए हैं। परगट ने कहा कि बीएसएफ पर केंद्र के फैसले के बाद आए कैप्टन के बयान ने सब कुछ साफ कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के साथ मिलकर कैप्टन राज्य में राष्ट्रपति शासन लगवाने की साजिश रच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 50 किमी तक बढ़ाने का फैसला पंजाब पर कब्जा करने की कोशिश के समान है। परगट ने कैप्टन से अपील की कि कैप्टन जी, इस तरह न करो। हम आपको और तरह से देखते हैं, कि आप बहुत बड़े नेता हैं। परगट ने आगे कहा कि दरअसल, इस नए फैसले को भी भाजपा और केंद्र सरकार के अब तक व्यवहार से जोड़कर देखना होगा। पंजाब, बंगाल, किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी वाली घटना, यह एक कड़ी का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जिस तरह की पोलराइजेशन सारे देश में कर रही है, उसी तरह पंजाब में करना चाहती है। परगट ने कहा कि पंजाब हुक्मरानों के ऐसे इरादों के नीचे कभी नहीं दबा। पंजाब और पंजाबियत हमेशा जिंदा रहेंगे।
गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में परगट सिंह कैप्टन पर लगातार हमलावर रहे, जबकि उनके साथ बैठे लोक निर्माण मंत्री विजय इंदर सिंगला खामोश रहे। हालांकि पत्रकारों ने जब सिंगला से पूछा कि क्या वह कैप्टन पर परगट के बयान से सहमत हैं, सिंगला ने कोई जवाब नहीं दिया। जब दोबारा पूछा गया तो परगट ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो कुछ पूछना है, मुझसे ही पूछ लें। परगट ने यह भी कहा कि कैप्टन अगर पार्टी बनाना चाहते हैं तो बना लें। जाखड़ द्वारा मुख्यमंत्री चन्नी पर उठाए गए सवाल को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में परगट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसी कोई बात गृहमंत्री के सामने नहीं रखी और न ही उन्हें कोई पत्र दिया है।
बीएसएफ के जरिये आधे पंजाब पर भाजपा का कब्जा : लाल सिंह
पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता लाल सिंह ने कहा है कि बेवजह विस्तारित क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के साथ बीएसएफ को व्यापक अधिकार देना, गृह मंत्रालय का साधारण नियमित आदेश नहीं है। यह बीएसएफ के जरिये पंजाब पर शासन करने के लिए भाजपा के षड्यंत्र की झलक है। उन्होंने कहा कि केंद्र का दुर्भावनापूर्ण आदेश, भारत के संविधान में शक्ति के पृथक्करण के सुपरिभाषित सिद्धांत को गंभीर रूप से बाधित और विकृत करता है। उन्हें डर है कि यह संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत परिभाषित केंद्र और राज्य के दायित्व की वैधता को भी प्रभावित करेगा। लाल सिंह ने कहा कि इसे भारत के अल्पसंख्यकों के खिलाफ ‘बहुसंख्यक आक्रमण’ की भयावह योजना के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब को केंद्र के इस फैसले को संविधान की भावना और संविधान के तहत राज्यों को दी गई सांविधानिक गारंटी के खिलाफ प्रतिशोध और बर्बरता के कार्य के रूप में देखना चाहिए। लाल सिंह ने कहा कि यदि आप पंजाब के पांच सीमावर्ती जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का को बीएसएफ के नियंत्रण में रखते हैं, तो इसका अर्थ है कि भाजपा ने बीएसएफ के माध्यम से पंजाब के आधे हिस्से पर व्यावहारिक रूप से कब्जा कर लिया है।