उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठियां बरसाईं। पानी की बौछारें व आंसू गैस के गोले भी छोड़े। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की, जिसमें तीन पुलिस कर्मचारियों और एक नागरिक को गंभीर चोट आईं।
25 लाख मुआवजा और नौकरी की मांग
मामला गरमाने पर जिला पुलिस कप्तान लोकेंद्र सिंह और जिला उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने संघर्ष कमेटी के पास संदेश भिजवाया कि उनके साथ एक वार्ता की जानी आवश्यक है। इस पर खेदड़ गोशाला संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि पुलिस झड़प में घायल व लापता साथियों की उन्हें अभी पूरी जानकारी नहीं है। ऐसे में प्रशासन के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।
मृतक धर्मपाल के परिजनों को 25 लाख मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं दिए जाने तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति के सदस्यों का आरोप है कि धर्मपाल के शव पुलिस कहां लेकर गई यह भी पता नहीं हैं। पुलिस शव के साथ छेड़छाड़ कर सकती है, इसलिए पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी करवाई जाए। देर शाम तक संघर्ष समिति के सदस्यों की गांव की गोशाला में एक बैठक चल रही थी।
यह है राख का विवाद
खेदड़ थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख को अब तक इस गांव के लोग ही उपयोग करते रहे हैं। राख को आसपास के ईंट भट्ठों को बेचकर मिलने वाले पैसे का उपयोग गोशाला को चलाने के लिए किया जाता है। अब केंद्र सरकार ने सभी थर्मल प्लांट की राख का ऑनलाइन टेंडर निकालकर इसे बेचने के आदेश दिए हैं। इसके विरोध में किसान और ग्रामीण 86 दिन से धरना दे रहे हैं। 30 जून को चेतावनी दी थी कि मांगें न मानी गईं तो आठ जुलाई को रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा। जिस ट्रैक से थर्मल प्लांट को कोयला आता है उस पर पड़ाव डाला जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर से बैरिकेड तोड़ा
पुलिस टीम जिला उपायुक्त के आने का इंतजार कर रही थी। इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के ट्रैक्टर से बैरिकेड तोड़ दिया। ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक नागरिक और तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने संयम बरता। स्थिति बेकाबू होती देख वाटर कैनन और आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा।
- लोकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक।