बठिंडा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री सड़क के रास्ते फिरोजपुर के लिए रवाना हुए। उनका काफिला बठिंडा-फिरोजपुर फोरलेन से होते हुए निकला। एसपीजी प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री के आने-जाने के लिए जो रूट इस्तेमाल किया जाता है, उस रास्ते की हर तरह से जांच की जाती है। सुबह 7 बजे से 9 बजे तक हाईवे पर कहीं कोई रुकावट नहीं थी। दोपहर 12 बजे के बाद अचानक चीजें बिगड़ती चली गईं और किसान संगठनों के सदस्य व शरारती तत्व हाईवे तक पहुंचने में कामयाब हो गए।
रूट के बारे में प्रदर्शनकारियों को पहले ही पता चल चुका था। इसके बाद उन्होंने बगल के गांव प्यारेआणा में स्पीकर से घोषणा कर भीड़ इकट्ठी की और एक ट्रॉली लगाकर फ्लाईओवर को पूरी तरह जाम कर दिया। 1.20 पर पीएम का काफिला सड़क पर ही रुक गया। अधिकारियों की तरफ से लगातार वायरलेस कर जानकारी दी गई कि पीएम का काफिला रुक गया है। पंजाब पुलिस के अधिकारियों की सांसें भी अटक गईं। अधिकारी वायरलेस पर मैसेज देते रहे। पंजाब पुलिस के अधिकारी इस इलाके की संवेदनशीलता से अच्छी तरह वाकिफ थे क्योंकि इसी इलाके में एनआईए के अलावा पंजाब की काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसियों का लगातार ऑपरेशन चल रही हैं।
लंबे समय से पाकिस्तान में शरण लेकर बैठे इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के चीफ लखबीर सिंह रोडे का इलाका निकट में ही है। लखबीर सिंह रोडे ने पाकिस्तान से टिफिन बम की डिलीवरी ड्रोन के जरिए की थी। एक आतंकी ने स्वीकार किया था कि एक-दो टिफिन बम की डिलीवरी फिरोजपुर में की जा चुकी है।
बताते हैं कि जब पीएम का काफिला रुका तो मौके पर खड़े अधिकारियों से लेकर चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर में हड़कंप मच गया और वायरलेस पर मैसेज आने शुरू हो गए। पीएम का काफिला जब यूटर्न लेकर वापस बठिंडा की तरफ रवाना हुआ तो अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
निकट पहुंच गए थे किसान...
प्रधानमंत्री का काफिला नेशनल हाईवे पर जिस जगह रुका, प्रदर्शनकारी उससे कुछ दूरी पर आगे बैठे हुए थे। प्रदर्शनकारियों को जैसे ही पीएम के रास्ते में ही रुकने की जानकारी मिली, उनमें से कुछ लोग वहां से काफिले की ओर चल पड़े। इनमें से कुछ लोग तो काफिले के पास पहुंच भी गए। उसके बाद हालात को भांपते हुए पीएम के सुरक्षा अधिकारियों ने वापस लौटने का फैसला लिया। इससे पहले कि किसानों की भीड़ पीएम का काफिला घेर लेती, अधिकारियों ने तेजी से काफिले को वापसी का रुख कर लिया।