स्टेडियम के लिए दी गई जमीन पर स्टेडियम का नाम निशान भी नहीं है। स्टेडियम की पांच किले की जमीन पर घुटनों तक घास हैं और बरसात होने के कारण दलदल है। सरकार के एलान के बाद और जमीन तय करने के बाद गांव के खिलाड़ियों ने खुद ही ईंट लगाकर स्टेडियम में अलग-अलग ग्राउंट बनाए थे लेकिन जमीन पर विवाद होने के कारण अब खिलाड़ियों ने यहां खेलना छोड़ दिया है।खिलाड़ियों का कहना है कि पहले इस स्टेडियम में 50 से ज्यादा खिलाड़ी रोज खेलने आते थे।
तीन साल पहले मैं खुद क्रिकेट खेलता था पर स्टेडियम न होने के कारण छोड़ दिया है। सिर्फ मैंने ही नहीं गांव के कई खिलाड़ी ने स्टेडियम की जमीन पर विवाद होने के बाद खेलना छोड़ दिया है। - रिंकू, खिलाड़ी
स्टेडियम केवल नाम नाम का है। स्टेडियम में घुटनों तक की घास हैं न तो स्टेडियम समतल है न ही सूखी जमीन। दलदल बना है। कोई खिलाड़ी खेलना चाहे तो भी नहीं खेल सकता है। - पवन, खिलाड़ी
सरपंच द्वारा दी गई जमीन पंचायत की नहीं बल्कि शामलात की है, जिसे सरपंच ने स्टेडियम के लिए दे दिया था लेकिन अब इस स्टेडियम पर स्टे ऑर्डर है। - दिपक, खिलाड़ी
गांव से 200 मीटर दूर ही पंचायत की आठ किले जमीन खाली है। सरकार को उस पर स्टेडियम बनाना चाहिए। यदि स्टेडियम नहीं बनाया गया तो गांव में यह 25 खिलाड़ी भी धीरे- धीरे खेलना बंद कर देंगे। - अमन,खिलाड़ी