चंडीगढ़। पीजीआई के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग का गेट लैब हड्डी और न्यूरो के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस लैब की मदद से इन विभागों के मरीजों के मर्ज के कारणों को बारीकी से तलाशने में मदद मिल रही है जिससे विशेषज्ञ बिना देरी किए इलाज कर उस मर्ज को दूर कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस रीजन में सिर्फ पीजीआई में ही यह गेट लैब स्थापित है। यहां चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के रेफर मरीजों का गेट एनालिसिस किया जा रहा है। महीनेभर में यहां 50 से 60 मरीजों का गेट एनालिसिस किया जा रहा है।
केस- 1
दो माह के इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो गया कुलविंदर
हमीरपुर निवासी 39 वर्षीय कुलविंदर को पिछले नौ माह से चलने में परेशानी हो रही थी। निजी डॉक्टर को दिखाने के बाद उन्होंने पीजीआई के हड्डी रोग विभाग में दिखाया। वहां से डॉक्टरों ने न्यूरो में रेफर कर दिया, लेकिन वहां भी परेशान का कारण पूरी तरह पकड़ में नहीं आया। न्यूरो से कुलविंदर को शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के गेट लैब में रेफर किया गया। वहां उसका गेट एनालिसिस किया गया। इसके बाद उनकी समस्या का कारण सामने आया। महज दो महीने के इलाज के बाद कुलविंदर पूरी तरह ठीक हो गया।
केस- 2
एनालिसिस से पता चला गिरने के दौरान पैर में भी आई थी चोट
हिमाचल की सुमन डेढ़ साल पहले बिस्तर से गिर गई। कमर में काफी चोट आई। उस दौरान निजी डॉक्टर को दिखाया गया। दर्द निवारक दवाओं से कुछ समय तक आराम रहा, लेकिन फिर समस्या बढ़ने लगी। वह भी पीजीआई आई। हड्डी रोग विभाग में दिखाया। एमआरआई कराया, लेकिन समस्या की जड़ का पता नहीं लग पाया। सुमन को भी गेट लैब में भेजा गया। इसके बाद एनालिसिस से पता चला कि गिरने के दौरान पैर में भी चोट आई थी। पैर की उस चोट के कारण चलने की प्रक्रिया में हुए बदलाव से कमर में दर्द हो रहा है। समस्या सामने आ जाने के बाद सही इलाज शुरू हुआ।
बॉक्स
लैब में एक-एक बिंदु पर बारीकी से रखी जाती है नजर
गेट लैब की विशेषज्ञ व पीजीआई शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की डॉ. सौम्या सक्सेना ने बताया कि कोविड के बाद से लैब में काफी रेफर मरीज आ रहे हैं। लैब की कार्य विधि के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें दो वीडियो कैमरे और छह इन्फ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं। वहीं प्रेशर प्लेटमार्म बनाया गया है। प्रक्रिया शुरू करने से पहले मरीज के मुख्य बिंदुओं जैसे दोनों हाथ, कंधे, कमर, पीठ, गर्दन, पैर, घुटने पर मार्कर लगाते हैं। फिर मरीज को प्रेशर प्लेटफार्म पर चलाते हैं। जब मरीज चलता है तक उसके शरीर पर लगाए गए मार्कर के माध्यम से वीडियो और कैमरे पर लगातार उसकी पल पल की प्रक्रिया को रिकाॅर्ड करते रहते हैं।
गेट एनालिसिस में कमर से पैर तक का हर एंगल से व्यापक विश्लेषण
रिकाॅर्डिंग और प्रेशर लेने के बाद उसकी एनालिसिस की जाती है। डॉ. सौम्या ने बताया कि इस एनालिसिस के बाद वे रिपोर्ट बनाती हैं, जिसमें मुख्य रूप से मरीज की परेशानी का कारण चिह्नित किया जाता है। डॉ. सौम्या का कहना है कि खास परेशानी वाले मरीजों के लिए यह तकनीक बेहद कारगर है। कई बार जिस परेशानी का कारण एमआरआई में भी सामने नहीं आ पाता, उसे गेट एनालिसिस से पता लगाया जा सकता है, क्योंकि एमआरआई अंग विशेष की होती है जबकि गेट एनालिसिस में कमर से पैर तक का हर एंगल से व्यापक विश्लेषण किया जाता है।