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Chandigarh News: पीजीआई फैकल्टी ने रेजिडेंट डॉक्टर से मांगी माफी, मामला रफा-दफा

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चंडीगढ़। पीजीआई हेप्टोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (फैकल्टी) ने अपने ही विभाग के आत्महत्या का प्रयास करने वाले सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर, उसके परिजनों और विभाग से लिखित माफी मांगी है। इसके बाद मामला रफा-दफा हो गया है। यह पहली बार है जब किसी आरोपी फैकल्टी ने इस तरफ माफी मांगी है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के आत्महत्या प्रकरण को लेकर मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआई ने गुरु-शिष्य परंपरा का उदाहरण पेश करते हुए मिसाल कायम की है। इस घटना का निष्कर्ष गुरु-शिष्य परंपरा की जीत को दर्शाता है। इस बार गुरु की गलती थी तो उसने शिष्य से माफी मांग ली है। इस प्रकरण ने फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच आने वाली दीवार को गिरा दिया है। यह मामला समाप्त हो चुका है। उधर, संस्थान में चर्चा रही कि हर बार की ही तरह आरोप सिद्ध होने के बावजूद फैकल्टी को बचा लिया गया है। वहीं, पीड़ित रेजिडेंट डॉक्टर ठीक है और पीजीआई में फिर ज्वॉइन कर चुका है।
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प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआई के लिए उसके फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टर दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण हैं। फैकल्टी के लिए सजा की मांग की जा रही थी लेकिन सजा की जगह सकारात्मक संदेश देना जरूरी था। उन्होंने पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन को सैल्यूट किया और कहा कि उनका सहयोग सराहनीय रहा। इस दौरान डीन एकेडमिक प्रो. एनके पांडा, डीडीए कुमार गौरव धवन, हेप्टोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अजय दुसेजा, न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. धीरज खुराना, पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. समीर अग्रवाल, प्रो. अमन शर्मा और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नवीन मौजूद थे।

बता दें कि हेप्टोलॉजी विभाग के एक सीनियर रेजिडेंट ने पिछले मंगलवार को आत्महत्या का प्रयास किया था। सीनियर रेजिडेंट ने अपने ही विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर पर संस्थान में शामिल होने के बाद से अपमानित करने और असहनीय माहौल बनाने का आरोप लगाया था। घटना सामने आने के बाद पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मामले की जांच कर 72 घंटे में रिपोर्ट सौंपने के लिए डीन एकेडमिक प्रो. नरेश के पांडा के नेतृत्व में एक पैनल का गठन किया था। अब कमेटी की रिपोर्ट के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया है।
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अब हर कमेटी में होंगे रेजिडेंट डॉक्टर
प्रो. विवेक लाल ने बताया कि अब पीजीआई में कॉलेजियम के तहत हर कमेटी में रेजिडेंट डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा ताकि वे संस्थान के हर निर्णय में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि ऐसा देश में पहली बार हुआ है, जब किसी चिकित्सा संस्थान में सभी कमेटियों में रेजिडेंट को सदस्य बनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसा करने से उनको शोषण जैसी स्थिति से बचाने में भी मदद मिलेगी। क्योंकि वे कमेटी के माध्यम से हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।
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