ग्रीन कॉरिडोर में सबका साथ है जरूरी
रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर बनाने और उसकी सफलता में पीजीआई के डॉक्टरों की टीम, कमेटी, रोटो की टीम, ट्रैफिक पुलिस, चंडीगढ़ के साथ मोहाली पुलिस के अलावा एयरपोर्ट प्रशासन का योगदान रहता है। इन विभिन्न टीमों में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका उस अंग को दूसरे स्थान पर भेजने में बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि अंग को निकालने से लेकर उसे सुरक्षित और तय समय पर एयरपोर्ट पहुंचाना व उड़ान भरवाना ही प्रत्यारोपण को सफल बनाता है।
तय समय के बाद ये अंग हो जाते हैं बेकार
- दिल: 4 से 6 घंटा
- फेफड़ा: 4 से 6 घंटा
- किडनी: 48 से 72 घंटा
- लिवर: 12 से 24 घंटा
- पैंक्रियाज: 12 से 18 घंटा
- आंत: 6 से 12 घंटा
- आंखें: 4 से 6 घंटे
ये भी जान लें
प्रत्यारोपित किए जाने वाले अंग को तय समय के अंदर मृतक के शरीर से निकाल लेना चाहिए। आंखों से कॉर्निया और आइबॉल जैसे पार्ट लिए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि एक व्यक्ति की आंखें सिर्फ एक ही व्यक्ति को रोशनी दे सकती हैं बल्कि एक व्यक्ति के कॉर्निया से 3 से 4 लोगों की जिंदगी को रोशन किया जा सकता है। कुछ लोगों के हृदय और फेफड़े दोनों एक साथ डोनेट किए जाते हैं। इस केस में भी 4 से 6 घंटे के अंदर ही शरीर से निकालने और प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया को पूरा करना होता है।