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उपलब्धि: कार टी-सेल थैरेपी से कैंसर का इलाज करने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बना पीजीआई चंडीगढ़

Sun, 10 Sep 2023 08:12 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

विदेश में इस तकनीक से इलाज के लिए 4-5 करोड़ देने पड़ते हैं। पीजीआई में 50 से 60 लाख लगेंगे। कैंसर के तीन मरीजों पर ट्रायल सफल होने पर प्रक्रिया शुरू की गई है।
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विस्तार
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पीजीआईए के क्लीनिकल हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थैरेपी (कार टी-सेल थैरेपी) से कैंसर का इलाज शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि पीजीआई चंडीगढ़ इस तकनीक से कैंसर का इलाज करने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है।

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पीजीआई ने ट्रायल के तौर पर इस तकनीक से तीन मरीजों का सफल इलाज किया। अब इसे शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रहीं हैं। यह पीजीआई के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इस तकनीक से विदेश में इलाज कराने पर 4 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आता है जबकि पीजीआई में 50 से 60 लाख ही लगे। यह जानकारी पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने शनिवार को एक प्रेसवार्ता कर दी।

क्लीनिकल हेमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पंकज मल्होत्रा ने बताया कि कार टी-सेल थैरेपी की शुरुआत हमने 14 मार्च 2023 को तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीड़ित एक रोगी पर की थी। इसके बाद लिम्फोमा और एक अन्य ल्यूकेमिया रोगी से जुड़े अतिरिक्त मामले सामने आए। तीनों मरीजों ने उपचार के बाद सकारात्मक प्रगति दिखाई है। यह बोन मैरो प्रत्यारोपण की तुलना में ज्यादा असरदार है। 
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प्रो. पंकज ने बताया कि 2003 से बोन मैरो प्रत्यारोपण किया जा रहा है, जिसमें अब तक 520 लोगों के प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इनमें 80 बच्चे शामिल हैं। इन मरीजों में 80 प्रतिशत तक सफलता दर सामने आई है। अब 10 बेड वाले वयस्कों की यूनिट की ही तरह बच्चों के लिए अलग से 6 बेड मिलने से यह रफ्तार बढे़गी। मौजूदा समय में इसके लिए 7 से 8 महीने की वेटिंग दी जा रही है। बेड बढ़ने से वेटिंग कम हो जाएगी।

लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में भी पाई सफलता
निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि संस्थान में अंग प्रत्यारोपण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। इससे महज एक साल में वेटिंग का समय एक साल से घटकर दो महीने पर आ गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 225 रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के साथ, हम पिछले पूरे वर्ष के दौरान की गई ट्रांसप्लांट की संख्या को पहले ही पार कर चुके हैं। इसी क्रम में 7 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश के 46 वर्षीय पुरुष रोगी पर सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कर एक और सफलता प्राप्त की है। प्राप्तकर्ता को उसकी पत्नी ने अपना लीवर दान किया था। 

मरीज की पत्नी ने अपने लीवर का 55% हिस्सा (दायां लीवर) दिया। सर्जरी लगभग 12 घंटे तक चली थी। प्राप्तकर्ता और दाता दोनों की स्थिति सामान्य है। सर्जरी के सात दिन बाद डोनर को छुट्टी दे दी गई थी। प्राप्तकर्ता को सर्जरी के 26वें दिन यानी 2 सितंबर 2023 को छुट्टी दी गई। पीजीआई में यह सर्जरी 14 लाख रुपये में हो गई जबकि निजी अस्पताल में इस पर लगभग 35 लाख का खर्च आता है। यह सर्जरी प्रोफेसर टीडी यादव के नेतृत्व में की गई।

पांच नए विभाग बनाने की तैयारी
प्रो. विवेक लाल ने बताया कि पिछले वर्ष पीजीआई में 30 लाख मरीजों का इलाज किया गया। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए विभागों के विस्तार की योजना बनाई जा रही है। इसके अंतर्गत 5 नए विभाग बनाए जाएंगे। वहीं, बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी का विस्तार करते हुए वहां 10 बेड बढ़ाने और दो ओटी देने की भी घोषणा की। इससे बच्चों को समय पर इलाज उपलब्ध हो सके। इस दौरान डीडीए कुमार गौरव धवन, चिकित्सा अधीक्षक प्रो.विपिन कौशल, वित्तीय सलाहकार कुमार अभय भी उपस्थित रहे।

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