गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप के कारण होने वाली प्री-एक्लेमप्सिया की स्थिति को पीजीआई एनेस्थिसिया विभाग के विशेषज्ञों ने फेफड़े का अल्ट्रासाउंड कर नियंत्रित करने का तरीका निकाला है। ऐसा करके वे प्रसव से पहले ही महिला के फेफड़े में बढ़ रहे पानी की स्थिति की जानकारी लेकर बचाव कार्य शुरू कर सकते हैं। फेफड़े में पानी बढ़ने पर काबू पाकर प्रसूता और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने इस तकनीक को शोध के जरिए प्रमाणित किया है। इस शोध को एनेस्थीसिया एन एनेलजेसिया जर्नल में जनवरी 2023 में प्रकाशित किया गया है।
शोध की प्रधान अन्वेषणकर्ता एनेस्थिसिया विभाग की डॉ. काजल जैन ने बताया कि प्री-एक्लेमप्सिया एक गंभीर स्थिति होती है। इस स्थिति में गर्भवती महिला को उच्च रक्तचाप के कारण दौरे पड़ने लगते हैं। यदि एक्लेम्पसिया का इलाज न किया जाए तो मां और बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 14 फीसदी प्रेगनेंट महिलाओं की मृत्यु एक्लेम्पसिया के कारण होती है। इससे पहले तक ऐसे केस में अंतिम क्षणों में बचाव बेहद मुश्किल होता था। इसलिए बचाव के लिए महिला की हिस्ट्री के अनुसार लक्षणों के आधार पर प्रसव से पहले फेफड़े का अल्ट्रासाउंड करने का निर्णय लिया गया। ऐसा करके फेफड़े में अचानक से पानी बढ़ने से शुरू होने वाली इस समस्या को शुरुआती दौर में ही काबू किया जा सकता है।
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70 महिलाओं पर किया शोध
डॉ. काजल ने बताया कि डेढ़ महीने के दौरान पीजीआई में ऐसी हिस्ट्री वाली आई 70 गर्भवतियों पर शोध किया गया। उनमें से 40 को प्रसव के दौरान प्री-एक्लेमप्सिया हुआ जिसे अल्ट्रासाउंड करके समय पर बचाव करने में सफलता प्राप्त की गई।
प्री-एक्लेमप्सिया आप भी जान लें
प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद उच्च रक्तचाप है जो गर्भवती व्यक्ति के अंगों या बच्चे को प्रभावित कर सकता है। गंभीर प्री-एक्लेमप्सिया से खतरनाक दौरे (एक्लेमप्सिया) हो सकते हैं। प्री-एक्लेमप्सिया आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद चला जाता है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाए सचेत
प्रीक्लैंप्सिया के लक्षणों में हाई बीपी, चेहरे या हाथों में सूजन, सिरदर्द, अत्यधिक वजन बढ़ना, जी मतली और उल्टी, आंखों से संबंधित समस्या जिसमें कभी-कभी नजर कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना, पेशाब करने में दिक्कत, खासतौर पर पेट की बाईं ओर के ऊपरी हिस्से में दर्द होना शामिल है।
ये कारण हैं जिम्मेदार
डॉ. काजल जैन ने बताया कि जब ब्ल्ड प्रेशर बढ़ता है या धमनियों की दीवारों में खून का प्रवाह तेज होता है तो धमनियों एवं रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। धमनियों को नुकसान होने पर रक्त प्रवाह रुक सकता है और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं और गर्भस्थ शिशु में सूजन आ सकती है। यदि यह असामान्य रक्त प्रवाह वाहिकाओं से होकर दिमाग की कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं। सामान्य तौर पर प्रीक्लैंप्सिया किडनी के कार्य को प्रभावित करती है। पेशाब में प्रोटीन यानी प्रोटीनूरिया इस स्थिति का संकेत है।