इसी गणित के आधार पर सूबे के 275 पूर्व विधायकों को वर्ष 2017 से हर साल 37 करोड़ और पांच वर्ष में 186 करोड़ रुपये पेंशन के तौर पर दिए गए लेकिन जिन एक्ट का हवाला देते हुए अफसरों ने यह पेंशन तय की, ऐसा कोई प्रावधान किसी भी एक्ट में था ही नहीं। सूबे की अकाली-भाजपा सरकार ने अक्तूबर 2016 में पूर्व विधायकों की पेंशन को पहले कार्यकाल में 15000 रुपये और बाद के कार्यकाल के लिए 10-10 हजार रुपये का प्रावधान करते हुए साफ कर दिया था कि इस राशि में महंगाई भत्ता अन्य सरकारी मुलाजिमों को मिलने वाले महंगाई भत्ते के अनुसार ही जुड़ेगा।
अगर इस तरीके से पेंशन तैयार होती तो 15000 रुपये और 28 फीसदी डीए को मिलाकर 19200 रुपये ही पूर्व विधायक को मिलते। लेकिन अफसरों द्वारा की गई गड़बड़ी का नतीजा यह हुआ कि पूर्व विधायकों को 19200 रुपये की जगह 75150 रुपये पेंशन मिलती रही। इस तरह पांच साल के दौरान सरकारी खजाने से लगभग 192 करोड़ रुपये अधिक निकाल लिए गए।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। इस मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा। निर्धारित राशि से ज्यादा दी गई रकम की रिकवरी भी की जाएगी। कुलतार सिंह संधवा, अध्यक्ष पंजाब विधानसभा
पंजाब सरकार को मिला कांग्रेस का साथ
कांग्रेस विधायक और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने पूर्व विधायकों को एक ही पेंशन दिए जाने के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले का स्वागत किया है। शुक्रवार को उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘एक विधायक-एक पेंशन’ फैसले का हम तहेदिल से स्वागत करते हैं। इस तरह के फैसलों से पंजाब के खजाने पर यकीनन बोझ घटेगा।
बतौर विरोधी पक्ष हम हमेशा अच्छे फैसलों का स्वागत करते रहेंगे और गलत फैसलों पर टिका-टिप्पणी करते रहेंगे। पंजाब की भलाई हमारे लिए पहले नंबर पर है। उधर, कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि हम इस कदम का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि सूबे के हित में किए जाने वाले हर कदम का स्वागत करेंगे। पंजाब पहले ही कर्ज में डूब चुका है, ऐसे हालात में यह कदम स्वागत योग्य है। खैरा ने कहा कि सरकार अच्छा काम करेगी तो उसका स्वागत होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब पर जितना कर्ज है और प्रदेश के खर्चे पूरे करने के लिए केवल इतनी कटौती काफी नहीं होगी। शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत अयाली ने भी भगवंत मान सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।