बिहार से आया हूं, इंतजार में बैठा हूं
मुझे ब्रेन ट्यूमर है। इलाज के लिए पत्नी और बच्चों के साथ बिहार के आरा जिले से पीजीआई आया हूं। सोमवार को पीजीआई पहुंच गया था, तब से फुटपाथ पर सोकर और लंगर से गुजर-बसर चल रहा है। एक-दो बार डॉक्टर ने देखा है, कुछ जांच करवाने को कहा गया था लेकिन आज कोई जांच नहीं हो रही। इंतजार में बैठे हैं, इतनी दूर से आए हैं तो इलाज के बाद ही घर लौटेंगे। धर्मेंद्र, आरा (बिहार)
अनजान शहर में इलाज के लिए कहां जाऊं
एडवांस ट्रॉमा सेंटर के बाहर स्ट्रेचर पर दर्द से कराह रहा हूं। लुधियाना के ईएसआई अस्पताल ने गुरुवार देर रात चंडीगढ़ पीजीआई के लिए रेफर किया था। शुक्रवार सुबह पीजीआई पहुंचे लेकिन यहां कोई सही से बात ही नहीं कर रहा है। एक दुर्घटना में पैर में फ्रैक्चर आ गया है, दर्द सहा नहीं जा रहा है। समझ नहीं आ रहा है, अनजान शहर में इलाज के लिए कहां जाएं। -अनूप, लुधियाना
आंत की बीमारी, जांच नहीं हो रही
मेरे पति की आंत बढ़ी हुई है। बीते मंगलवार को डॉक्टर को दिखाया तो कोई दवा नहीं दी। पहले जांच करवाने को बोला। बुधवार को पंजाब में छुट्टी के कारण जांच नहीं हो पाई। शुक्रवार को हड़ताल के चलते कहा जा रहा है कि जांच नहीं होगी। अब इतनी दूर से इलाज के लिए आए हैं तो बस इंतजार कर रहे हैं कि शायद हमारी बारी आए जाए। रुबी, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
इमरजेंसी से कहा गया ओपीडी जाओ, यहां ओपीडी बंद है
मेरी सास के पेट में भयंकर दर्द हो रहा है। शिमला से चंडीगढ़ पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी में दिखाया तो वहां से जवाब मिला कि ओपीडी में ले जाओ। ओपीडी गए तो वहां लोगों का हुजुम था, कर्मचारी बोले ओपीडी बंद है, इलाज नहीं होगा। सुबह से भटक रहे हैं, कोई कर्मचारी सही से जानकारी ही नहीं दे रहा है। इतनी दूर से आए हैं, अब अगर कुछ अनहोनी हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा ? रविंदर, राजगढ़ हिमाचल प्रदेश
तारीख मिली लेकिन डॉक्टर मौजूद नहीं
मेरे पिता और बड़े भाई को ब्रेन ट्यूमर है। 28 फरवरी को चंडीगढ़ आया तो 15 मार्च को पिता की सर्जरी हुई। डॉक्टरों ने शुक्रवार को टांके खुलवाने के लिए बोला था लेकिन यहां आए तो पता चला डॉक्टर ही नहीं हैं। भाई की अभी सर्जरी होनी है, उनके इलाज के लिए नेहरू अस्पताल में बोला गया था। वहां गए तो जवाब मिला कि डॉक्टर विदेश गए हैं, उनके आने के बाद ही इलाज होगा। तब तक आप आसपास कमरा लेकर इंतजार करो। हम इतनी दूर से बेहतर इलाज के लिए आए हैं लेकिन यहां पीजीआई प्रशासन बहुत ही गैर-जिम्मेदार है। मरीजों को इधर-उधर भटकाया जा रहा है। -आकिब, श्रीनगर
पीजीआई में ऐसी असुविधा की उम्मीद नहीं
मुझे त्वचा से संबंधित गंभीर बीमारी है। इसका पीजीआई में बेहतर इलाज हो सकता है। सुबह 5 बजे से इंतजार कर रही हूं। इस तरह की असुविधा से बेहद परेशान हूं। ईश्वर कौर (65), हिमाचल प्रदेश
सरकार और प्रशासन पर खड़े होते हैं सवाल
शिमला से पीजीआई मां का इलाज करवाने आया हूं। किसी मरीज का शिमला से पीजीआई आना और इस तरह से बिना इलाज के वापस जाना सरकार और पीजीआई प्रशासन के ऊपर सवाल खड़े करता है। गुरमीत, शिमला
सुबह से खा रहे हैं धक्के
डॉक्टर के पास गुरुवार को दिखाने आए थे। जांच करवाने का कहकर डॉक्टर ने शुक्रवार को आने के लिए कहा। अब सुबह से यहां धक्के खा रहे है। मध्यमवर्गीय व्यक्ति एक दिन शहर में रुकेगा तो इसका सीधा असर जेब पर पड़ता है। अब्दुल, सहारनपुर
अब करना पड़ेगा सात दिन इंतजार
सात दिन से इलाज के लिए शहर में रुके हुए हैं। जिस डॉक्टर से इलाज ले रहे हैं, वह सप्ताह में एक बार देखते हैं। डॉक्टर ने पिछले शुक्रवार को जांच करवाने को कहा था, जिसके आधार पर आज दवा देनी थी। अब सिर्फ दवा लेने के लिए अगले शुक्रवार का इंतजार करना होगा। रजिंदर, हिमाचल प्रदेश
इलाज की उम्मीद में भूखे-प्यासे बैठे
मेरा भाई चलने फिरने में असमर्थ है, उसके इलाज के लिए पीजीआई आई हूं। सुबह 4.30 बजे से बिना कुछ खाए-पीए इंतजार में बैठी हूं। कुछ समय में यदि आपीडी नहीं खुलती है तो वापस चले जाएंगे। मोबिना, बिजनौर
प्रशासन और कर्मचारियों के बीच पिस रहे
मुझे लंबे समय से गले से जुड़ी समस्या है। कई शहरों में इलाज लेने के बाद भी फायदा नहीं मिलने पर पीजीआई आए हैं। पीजीआई प्रशासन और कर्मचारियों के बीच तनातनी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। नवाब, उत्तर प्रदेश
बड़ी उम्मीद से आए थे, अब निराश लौट रहे
मेरा बेटा अपने पैरों पर शरीर का वजन नहीं ले पा रहा है। उसके इलाज के लिए डॉक्टरों ने कालका के अस्पताल से पीजीआई के लिए भेज दिया है। सुबह से इलाज की उम्मीद में धक्के ही खा रहा हूं, अब वापस जाने की सोच रहे हैं। मुन्ना, कालका