क्रिक कॉरिडोर से 29 शिक्षण संस्थान जुड़े हैं। इन संस्थानों के अधिकारियों व कुछ शिक्षकों को जोड़कर चार समितियां बनाई गई थीं, जिनमें 32 सदस्य थे। इन सभी की बैठकें समय-समय पर होनी थी। कोरोना काल में सभी संस्थानों की बैठकें ऑनलाइन चल रही थीं। जानकारों का कहना है कि इसके लिए भी बैठक ऑनलाइन हो सकती थी, लेकिन किसी ने इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
हालांकि तर्क ये दिए जा रहे हैं कि तमाम शिक्षण संस्थानों के मुखिया बदल गए। कुछ शिक्षक भी सेवानिवृत्त हो गए तो कुछ बदल गए। इसके कारण यह मंच आगे नहीं बढ़ सका। जानकारों का कहना है कि कोरोना से बाधा जरूर डाली, लेकिन शिक्षण संस्थानों के सभी कार्य हो रहे हैं, अधिकारी चाहते तो यह मंच भी दौड़ सकता था।
ऐसे रखी गई क्रिक की नींव
वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्रिक की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य था कि एक संस्थान के पास भरपूर बुनियादी ढांचा नहीं हो सकता है। ऐसे में शिक्षक, विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे संस्थानों की प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। इसका शुभारंभ सात से आठ शिक्षण संस्थानों से हुआ। शुभारंभ तो ठीक हुआ, लेकिन बाद में इसका कार्य धीमा होता चला गया। हालांकि समितियां बनाकर एक-दो बैठकें कोरोना के शुरू होने से पहले जरूर की गई थीं। इस मंच के अध्यक्ष वीसी होते हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि इस मंच को आगे बढ़ाएं।
- पीयू
- इमटेक
- नाइपर
- आईएनएसटी
- सीआईएबी
- नाबी
- पेक
- पीजीआई
- निटर
ये बननी हैं नई कमेटियां
क्रिक संचालन के लिए लाइब्रेरी शेयरिंग कमेटी, इंस्ट्रूमेंटल फैसिलिटीज शेयरिंग कमेटी, कमेटी टू फ्रेम रूल्स, कमेटी टू स्ट्रीमलाइन द ऑपरेशन ऑफ क्रिक बसेज आदि कमेटियां नए सिरे से बननी हैं। इनके जरिए ही तय होगा कि कोरोना काल में किन सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन छात्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। उनका शुल्क लगेगा या मुफ्त होंगी। पुस्तकालय को कैसे ऑनलाइन किया जा सकता है। शोध का लाभ कैसे मिलेगा, इन सभी पर यह कमेटियां निर्णय लेंगी।
कोरोना के कारण क्रिक का संचालन नहीं हो सका। इसके लिए अब जल्द ही बैठक करेंगे और छात्रों को ऑनलाइन सुविधाएं देने की योजनाएं तैयार करेंगे। - प्रो. एसके मेहता, समन्वयक, क्रिक कॉरिडोर