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झूठा केस दर्ज कराने वाले कांस्टेबलों पर एफआईआर के आदेश, जानिए मामला

Wed, 29 Nov 2017 09:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक चित्र - फोटो : demo pic
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साल 2010 में पुलिसकर्मियों से लड़ाई, मारपीट और सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के झूठे मामले में जिला अदालत के जेएमआईसी जसप्रीत सिंह ने एसएसपी चंडीगढ़ को दो पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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 अदालत ने कांस्टेबल मुकेश (नंबर-1958) और कांस्टेबल देवेंदर कुमार (नंबर-6479) को उनके अधिकारों के गलत इस्तेमाल पर उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 166, 323 और 193 के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए सेक्टर-22 निवासी सौरव महाजन और सेक्टर-30बी निवासी मोहन सिंह को आरोपमुक्त कर दिया गया है।

मामला 12 दिसंबर 2010 का है। पुलिस में दी शिकायत में कांस्टेबल मुकेश और देवेंदर ने कहा था कि वह दोनों सेक्टर-22सी में रात में पेट्रोलिंग पर थे। इस दौरान उन्होंने एक इंडिका कार को जिग-जैग आते देखा तो उसे रुकने का इशारा किया।
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कार चालक ने बजाय रुकने के कार को और तेज भगा दिया और वहां से भाग गए। थोड़ी देर बाद कार सवार फिर से वहां आया और गुस्से में उन्हें रोकने का कारण पूछा। साथ ही दोनों ने पुलिसकर्मियों को जोर से पकड़ लिया।

इसके अलावा उन्होंने उनसे गाली-गलौच की और बाद में उनसे हाथापाई की। इसी दौरान कांस्टेबल देवेंदर ने उसे दोनों से छुड़ाया। इस पर मोहन सिंह ने कांस्टेबल देवेंदर से मारपीट की। इसी दौरान एसआई ओम प्रकाश मौके पर पहुंचे। इसके बाद सौरव महाजन और मोहन सिंह के खिलाफ सरकारी कर्मी से मारपीट और ड्यूटी में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज किया गया।

हाईकोर्ट में नहीं सौंपी सीडी और सीसीटीवी फुटेज
दोनाें के खिलाफ मामला दर्ज होने पर उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की। 5 फरवरी 2014 को उन्होंने घटना के वक्त की वीडियो और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को आधार बनाया। इसमें पुलिस की कहानी के विपरीत अलग ही घटना सामने आई।

इसके बाद 15 दिसंबर 2014 को हाईकोर्ट ने सेक्टर-17 थाने के एसआई अमरजीत सिंह (वर्तमान में रिटायर्ड) को सीडी और फुटेज की एक्सपर्ट से जांच कराने के आदेश दिए। साथ ही इसकी रिपोर्ट अदालत में सौंपने को कहा। लेकिन, एसआई अमरजीत सिंह ने कोर्ट के आदेश के बावूजद सीडी को जांच के लिए नहीं भेजा।

वहीं, एसआई ने हाईकोर्ट के आदेशों की उल्लंघना करते हुए सीडी की एक्सपर्ट से जांच कराए बिना सीआरपीसी की धारा 173 के तहत जिला अदालत में चालान दायर कर दिया। जेएमआईसी ने एसआई द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों का पालन न करने को उनके मामले में खुद को दोषी पाने के बाद बचाए जाने वाली हरकत माना।

किस तरह पुलिसकर्मी करते हैं अधिकारों का गलत इस्तेमाल
जेएमआईसी जसप्रीत सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि, यह मामला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। आम आदमी का पुलिस पर विश्वास टूटा है, जबकि पुलिस को उनके अधिकारों व जीवन की रक्षा करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहिए।

इस मामले के सामने आने पर यह देखकर परेशानी होती है कि कैसे कुछ बेईमान, अनैतिक और मनमाने तरीके से काम करते हुए कुछ पुलिस अधिकारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को झूठे केस में फंसाते हैं।

वीडियो में पुलिसकर्मी मारपीट करते दिखे थे
बचाव पक्ष के अनुसार, पुलिस ने सौरव और मोहन के खिलाफ झूठा केस बनाया था। वीडियो और सीडी में साफ दिख रहा था कि पुलिसकर्मी सौरव और मोहन को पीट रहे थे।

पुलिस का कहना था कि दोनों आरोपी पहले भाग गए और फिर वापस आए और उसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों को पीटा, जबकि वीडियो में इसके उलट था। इसमें साफ-साफ दिख रहा था कि दोनों पुलिसकर्मी सौरव और मोहन को पीट रहे हैं। अदालत ने सीडी और वीडियो देखने के बाद सौरव और मोहन को आरोप मुक्त कर दिया और झूठी शिकायत देकर निर्दोष लोगों को फंसाने वाले दोनों कांस्टेबलों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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