चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने फैसला किया है कि मानसिक तौर पर अस्वस्थ लोगों के लिए जब तक स्थायी ग्रुप होम नहीं बनता, उन्हें मलोया के फ्लैट्स में शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। सिटीजंस फॉर इंक्लूसिव लिविंग सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि जिस विकल्प को सोसाइटी पहले ही खारिज कर चुकी है, प्रशासन उसी पर आगे क्यों बढ़ रहा है।
चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने वीरवार को सेक्टर-24 स्थित इंदिरा हॉलिडे होम का दौरा किया था और मानसिक तौर पर अस्वस्थ लोगों के लिए स्थायी ग्रुप होम बनाने पर चर्चा की थी। प्रशासक ने निर्देश दिए थे कि मानसिक तौर पर अस्वस्थ लोगों के लिए सेक्टर-34 में 1.25 एकड़ भूमि पर ग्रुप होम बनाया जाना चाहिए। इस जगह को सीनियर सिटीजन होम बनाने के लिए भी चयनित किया गया है और दो माह के अंदर इसका नींव पत्थर रखा जाना है। फैसला हुआ कि जब तक स्थायी ग्रुप होम तैयार नहीं होता, तब तक इनकी व्यवस्था मलोया स्थित सीएचबी के 16 फ्लैट्स में की जाएगी।
प्रशासन के इस फैसले के बाद सोसाइटी के सदस्यों ने बैठक की। महासचिव दीना सिंह ने कहा कि मलोया फ्लैट्स में ग्रुप होम को शिफ्ट करने का फैसला गलत और अनुचित है। ये छोटे फ्लैट अपने परिवार के साथ रहने वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन ग्रुप होम चलाने के लिए नहीं। प्रशासन के अधिकारी कोई फैसला लेने से पहले सोसाइटी के सदस्यों को भी विश्वास में नहीं लेते हैं।
ग्रुप होम में सीनियर सिटीजन होम की तरह सुविधाएं जरूरी : सिम्मी वड़ैच
उपाध्यक्ष सिम्मी वड़ैच ने कहा कि दुनिया के किसी भी विशेषज्ञ से बात करें तो वो भी यही कहेंगे कि फ्लैट्स में ग्रुप होम को चलाना सही नहीं होगा। कहा कि 5 जनवरी 2022 को यूटी सचिवालय में हुई बैठक में सभी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स द्वारा मलोया फ्लैट्स के विकल्प पर चर्चा की थी और उसे खारिज कर दिया गया था। प्रशासक के सलाहकार ने तब सुझाव दिया था कि एक समिति का गठन किया जाए और इस संबंध में सभी लोगों के सुझावों के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक हमें समिति के बारे में कोई सूचना नहीं मिली और न ही हमें अपनी राय देने के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि सीनियर सिटीजन होम की तरह ही ग्रुप होम में सुविधाएं जरूरी हैं, जिसमें लोगों व स्टाफ के रहने की उचित व्यवस्था, डाइनिंग और ओपन ग्रीन एरिया होना चाहिए।